पटना। नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा में पारित नहीं होने पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की महिला ब्रिगेड ने विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पटना में एनडीए की महिला मोर्चा की सदस्य सड़कों पर उतरी हैं। पटना के गांधी मैदान स्थित कारगिल चौक पर हजारों की संख्या में महिलाएं प्रदर्शन में जुटी हैं। महिलाओं के हाथों में तख्ती है। इनमें पोस्टर लगा है। इस पर लिखा है कि “नारी शक्ति की झूठी कहानी, कांग्रेस की आदत पुरानी”। विपक्ष देश की महिलाओं का हक छीन नहीं सकती है। इसे महिलाएं लेकर रहेंगी। आपको बता दें की मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि देश की महिलाओं के साथ धोखा हुआ है। विपक्ष का महिला विरोधी चेहरा उजागर हो गया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की सोच रही है कि हमारे घर की बहन और बेटी तो सांसद बन जाये लेकिन गरीबो के परिवार का कोई महिला सदस्य सांसद नहीं बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर महिला आरक्षण बिल पास हो जाता, तो बिहार विधानसभा में महिला जनप्रतिनिधि की संख्या 29 से बढ़कर कम से कम 122 हो जाती। इसी तरह देश के संसद में सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाती, जिसमें 216 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाती। जब देश की आबादी 70 करोड़ थी, तब भी संसद में 543 सीटें थी। आज जब आबादी बढ़कर 140 करोड़ हो गई है, तब भी सीटों की संख्या उतनी ही है।
वहीं भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री लाजवंती झा ने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण बिल) को पारित नहीं होने दिया बल्कि, कांग्रेस पार्टी एवं उनके सहयोगी दलों ने इस बिल के विरोध में मतदान किया और इसे रोका। सिर्फ रोका ही नहीं, उन्होंने बिल को रोकने का जश्न मनाया और अपना उत्साह पूरे देश के सामने प्रदर्शित किया। इन्हीं परिस्थितियों के विरोध में NDA के नेतृत्व में हमलोग प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष को यह एहसास दिलाने का कि महिलाओं का संकल्प इतिहास रच देता है। बड़ी संख्या में शामिल होकर इस आवाज़ को ताकत दें। वहीं भाजपा विधायक और गायिका मैथिली ठाकुर ने कहा कि सिर्फ वादे नहीं, अब हक की बारी है। जब नारी शक्ति एकजुट होती है, तो बड़े-बड़े अवरोध भी घुटने टेक देते हैं। 33% आरक्षण हमारा अधिकार है, और इसे हम लेकर रहेंगे। इसलिए हमलोग पटना में एकजुट हुए हैं। हमलोगों को अपनी ताकत दिखानी है। महिला मोर्चा की ओर से कहा गया कि विपक्ष की हठधर्मिता के कारण महिला आरक्षण बिल में बाधा आई। उन्होंने इसे पीएम मोदी की दूरदर्शी सोच बताते हुए कहा कि 33 प्रतिशत आरक्षण से महिलाओं का सामाजिक-राजनीतिक उत्थान निश्चित था। अंत में उन्होंने कहा कि विपक्ष की संकीर्ण मानसिकता के चलते देश की महिलाओं को इस ऐतिहासिक अवसर से वंचित होना पड़ा। इसका जवाब महिलाएं समय आने पर जरूर देंगी।
