नई दिल्ली। भारतीय एविएशन सेक्टर की तेज रफ्तार को देखते हुए सरकार ने देश में पायलटों की भारी कमी दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने सात प्रमुख एयरपोर्ट्स पर 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) शुरू करने की टेंडर प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। अगले 10 वर्षों में देश में लगभग 30 से 31 हजार अतिरिक्त पायलटों की आवश्यकता होगी, क्योंकि भारतीय एयरलाइंस अगले पांच वर्षों में अपने बेड़े में करीब 500 नए विमान शामिल करने जा रही हैं। इसके अलावा एयर इंडिया भी अगले 18 महीनों में 50 से 60 नए विमान जोड़ने की तैयारी में है।
वर्तमान में देश में डीजीसीए से मान्यता प्राप्त 41 फ्लाइंग स्कूल संचालित हो रहे हैं। नए 11 एफटीओ शुरू होने से शुरुआती दौर में हर साल 400 से 500 नए पायलट तैयार होंगे, जो पूर्ण क्षमता पर पहुंचकर 1,500 तक हो जाएंगे। इसमें 100 से अधिक नए ट्रेनिंग विमानों का उपयोग किया जाएगा। इस पहल से भारतीय छात्रों की विदेश जाकर महंगी पायलट ट्रेनिंग लेने की मजबूरी खत्म होगी और उन्हें देश में ही किफायती और सुलभ प्रशिक्षण मिल सकेगा। कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) जारी होने की संख्या में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे स्पष्ट है कि देश के युवाओं में एविएशन सेक्टर के प्रति रुझान तेजी से बढ़ रहा है।
