वाशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने लगातार तीसरी रात ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। दावा किया गया कि इन हमलों में ड्रोन लॉन्च साइट, मिसाइल ठिकानों और समुद्री निगरानी से जुड़े सैन्य ढांचे को निशाना बनाया गया।
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के बंदर अब्बास, किश द्वीप, क़ेश्म द्वीप और बुशहर प्रांत के जाम क्षेत्र में कई तेज धमाकों की खबरें सामने आईं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, इन इलाकों में एयर डिफेंस सिस्टम भी सक्रिय कर दिया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अभियान का उद्देश्य ईरान की ड्रोन, मिसाइल और समुद्री हमले करने की क्षमता को कमजोर करना है, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों और नागरिक समुद्री यातायात की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि, यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर की गई।
उधर, अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी हितों को निशाना बनाए जाने की खबरें हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में यूएई से जुड़े दो तेल टैंकरों पर हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि छह भारतीयों सहित आठ चालक दल के सदस्य घायल बताए गए हैं।
हमलों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान आगे भी जारी रह सकता है। एक रेडियो इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि, अमेरिका अपनी सैन्य ताकत का इस्तेमाल करते हुए ईरान की आक्रामक क्षमताओं को कमजोर करने के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा। ट्रंप ने आरोप लगाया कि, ईरान ने पूर्व समझौतों का पालन नहीं किया और अब अमेरिका सख्त जवाब दे रहा है।
ईरान की सरकारी मीडिया और समाचार एजेंसियों ने बंदर अब्बास, किश द्वीप, क़ेश्म द्वीप और बुशहर के जाम क्षेत्र में विस्फोटों की पुष्टि की है। तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, बंदर अब्बास में एयर डिफेंस सिस्टम को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अमेरिकी सेंटकॉम ने घोषणा की है कि, निर्धारित समय से ईरानी बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले समुद्री यातायात पर फिर से कड़ी निगरानी और नाकाबंदी लागू की जाएगी। अमेरिकी सेना का कहना है कि, इसका उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखना और किसी भी संभावित सैन्य गतिविधि को रोकना है। हालांकि, नियमों का पालन करने वाले व्यावसायिक जहाजों को सुरक्षित समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।

