नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त को लाल किले से घोषित ‘शक्ति की सप्त धाराÓ के तहत केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान 18 अगस्त को पूसा परिसर, नई दिल्ली में दोनों मंत्रालयों के विभागीय अधिकारियों को संकल्प दिलाएंगे। इस दौरान कृषि और ग्रामीण विकास के लिए वर्ष 2047 तक की कार्ययोजना तथा विभागीय रोडमैप पर विस्तृत संवाद किया जाएगा।
कार्यक्रम में कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालयों के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ प्रगतिशील किसान, लखपति दीदियां, कृषि क्षेत्र के निर्यातक और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि भी भाग लेंगे। बैठक में किसानों और ग्रामीणों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेने के साथ योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की रणनीति पर चर्चा होगी।
2047 तक विकसित भारत के लिए ठोस कार्ययोजना
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में घोषित ‘शक्ति की सप्त धाराÓ कृषि और ग्रामीण भारत के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत है। उन्होंने कहा कि सरकार इसे जन-आधारित कार्यक्रमों, पारदर्शी निगरानी और मजबूत क्रियान्वयन के माध्यम से जमीन पर उतारेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों और ग्रामीण महिलाओं को योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाना है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए कृषि और ग्रामीण विकास को मजबूत करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से 18 अगस्त को विभागीय रोडमैप पर चर्चा कर योजनाओं के क्रियान्वयन को और गति दी जाएगी।
कृषि विस्तार और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में ‘शक्ति की सप्त धाराÓ के तहत कृषि और खाद्य उत्पादन को मजबूत करने को प्राथमिकता दी है। इसमें कृषि का विस्तार, खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने और भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है।
सरकार कृषि क्षेत्र में निर्यात के नए अवसर तलाशने और किसानों को वैश्विक बाजारों से जोडऩे की दिशा में भी काम कर रही है। कृषि और समुद्री उत्पादों के क्षेत्र में नए बाजार तथा अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
किसानों को रियायती दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता
वैश्विक संकट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी उथल-पुथल के बीच किसानों को रियायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई है। साथ ही वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देश को उर्वरक और ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं के मामले में सुरक्षित एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए पिछले एक दशक में किए गए दीर्घकालिक प्रयासों को रेखांकित किया गया है।
आगामी संवाद में कृषि उत्पादन बढ़ाने, खाद्य प्रसंस्करण को मजबूत करने, कृषि निर्यात को बढ़ावा देने तथा किसानों के लिए बाजार और आय के नए अवसर विकसित करने से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी।
6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य
ग्रामीण विकास मंत्रालय की लखपति दीदी योजना को ‘शक्ति की सप्त धाराÓ के तहत महत्वपूर्ण प्राथमिकता दी गई है। अब तक देश में 3 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी बनाया जा चुका है। प्रधानमंत्री ने इस संख्या को बढ़ाकर 6 करोड़ करने का लक्ष्य रखा है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए योजना के विस्तार और प्रभावी क्रियान्वयन की रूपरेखा पर केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान अधिकारियों तथा लाभार्थियों के साथ संवाद करेंगे।
स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को कौशल और वित्तीय सहायता
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को विभिन्न क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और उनके उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है।
प्रधानमंत्री ने महिला सशक्तीकरण को विकास की महत्वपूर्ण धारा बताते हुए समाज से महिलाओं की क्षमता और योगदान का सम्मान करने का आह्वान किया है।
‘शी-मार्टÓ से महिला उत्पादों को मिलेगा बाजार
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्रीय बजट में ‘शी-मार्टÓ जैसी पहलों को भी जोड़ा गया है। इन पहलों का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना तथा उन्हें व्यापक उपभोक्ता आधार से जोडऩा है।
‘शी-मार्टÓ और ब्रांडिंग से जुड़ी पहलों के माध्यम से योग, आयुर्वेद, हस्तशिल्प और ग्रामीण उत्पादों को देश के साथ-साथ वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जाएगी।
किसान और ग्रामीण महिलाएं विकास की धुरी
18 अगस्त को पूसा परिसर में होने वाला संवाद कृषि, ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण से जुड़ी योजनाओं को नई दिशा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण होगा। सरकार का जोर किसानों, ग्रामीण महिलाओं और कृषि आधारित उद्यमों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने तथा आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार और वित्तीय संसाधनों तक उनकी पहुंच बढ़ाने पर है।
‘शक्ति की सप्त धाराÓ के तहत कृषि और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता देते हुए केंद्र सरकार वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए दीर्घकालिक और जन-केंद्रित कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दे रही है।
