घर में घुसकर तेंदुए ने 13 बकरा-बकरियों को मार डाला, चोरिया गांव में दहशत; शहर से गांव तक बढ़ रही वन्यजीवों की दस्तक
शिकायतों के बाद भी नहीं थम रही आवाजाही, ग्रामीणों ने गश्त और निगरानी बढ़ाने की उठाई मांग
कांकेर। जंगलों से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच रहे तेंदुए और भालुओं की बढ़ती गतिविधियों ने कांकेर जिले में लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शहर से लेकर गांवों तक वन्यजीवों की मौजूदगी से लोग दहशत में हैं। कहीं भालुओं की दस्तक से भय का माहौल है, तो कहीं तेंदुए मवेशियों को निशाना बना रहे हैं। ताजा मामला सरोना वन परिक्षेत्र के चोरिया गांव का है, जहां एक तेंदुए ने घर में घुसकर 13 बकरा-बकरियों को मार डाला। घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया। इस घटना ने वन्यजीवों की निगरानी और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घर में घुसा तेंदुआ, 13 बकरा-बकरियों की मौत
जानकारी के अनुसार, चोरिया गांव निवासी चैत राम सलाम के घर में घुसे तेंदुए ने 13 बकरा-बकरियों को मार डाला। एक ही घटना में इतनी बड़ी संख्या में पशुओं की मौत से परिवार को भारी नुकसान हुआ है। घर के भीतर तेंदुए की मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। लोगों को आशंका है कि यदि वन्यजीव इसी तरह आबादी के बीच पहुंचते रहे, तो भविष्य में किसी व्यक्ति पर हमले की घटना भी हो सकती है। घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है।
शिकायतों के बाद भी खतरा बरकरार
जिले के अलग-अलग ग्रामीण क्षेत्रों में तेंदुए और भालुओं की गतिविधियों को लेकर लोग चिंतित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीवों की आवाजाही पर प्रभावी निगरानी जरूरी है। केवल सतर्क रहने की सलाह देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। प्रभावित क्षेत्रों में नियमित गश्त, वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर और सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। चोरिया की घटना ने एक बार फिर वन विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मवेशियों की सुरक्षा के साथ आर्थिक नुकसान की चिंता
ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन कई परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है। ऐसे में वन्यजीवों के हमले में मवेशियों की मौत से परिवारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। तेंदुए और भालुओं की बढ़ती सक्रियता के बीच ग्रामीणों को अपने परिवार और मवेशियों, दोनों की सुरक्षा की चिंता सता रही है। ग्रामीणों ने प्रभावित इलाकों में गश्त बढ़ाने, वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने और सुरक्षा के प्रभावी इंतजाम करने की मांग की है।
गरियाबंद में नक्सलियों के छिपाए विस्फोटकों का जखीरा बरामद, टिफिन IED और UBGL राउंड मिले
निगरानी बढ़ाने की जरूरत, ठोस कदम का इंतजार
चोरिया गांव की घटना ने वन्यजीवों और इंसानों के बीच बढ़ते टकराव की गंभीरता को उजागर किया है। अब जरूरत है कि वन विभाग प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी मजबूत करे और ग्रामीणों को समय पर सतर्क करने की व्यवस्था सुनिश्चित करे। साथ ही, पशुहानि के मामले में नियमानुसार मुआवजे की प्रक्रिया की जानकारी भी प्रभावित परिवार को दी जानी चाहिए।
सवाल यह है कि आबादी के बीच पहुंच रहे वन्यजीवों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे? समय रहते आवश्यक कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसी घटनाएं लोगों की परेशानी और भय को और बढ़ा सकती हैं।

