विश्वविद्यालय बचाओ के नारों के साथ 18 सूत्रीय मांगें रखीं
खैरागढ । इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में गुरुवार को छात्रों ने 18 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्य द्वार पर धरना-प्रदर्शन किया। ‘कुलपति हटाओ, विश्वविद्यालय बचाओ के नारों के बीच प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय में कथित प्रशासनिक एवं शैक्षणिक अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने और कुलपति डॉ. लवली शर्मा के वर्तमान तथा पूर्व कार्यकाल से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की। छात्रों ने शिक्षकों की कमी, अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति, परीक्षा और अंकसूची संबंधी समस्याओं के साथ शोध प्रक्रिया तथा शुल्क व्यवस्था में पारदर्शिता का मुद्दा भी उठाया।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से विभिन्न प्रशासनिक और शैक्षणिक मामलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन उनका संतोषजनक समाधान नहीं हो पाया है। छात्रों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा, पारदर्शिता और विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों से जुड़ा है। उन्होंने मांग की कि शासन स्तर पर निष्पक्ष जांच समिति गठित कराई जाए और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं।
शिक्षकों की कमी और नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए सवाल
छात्रों ने संगीत संकाय के विभिन्न विभागों में स्वीकृत, रिक्त और कार्यरत शिक्षकों के पदों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। गायन, तबला और तंत्री विभाग में शिक्षकों की उपलब्धता के साथ अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में कथित देरी और अनियमितताओं की जांच कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। इसके अलावा सहायक अध्यापक भर्ती, डीन की नियुक्ति में निर्धारित योग्यता एवं पात्रता और कथक विभाग में विषय विशेषज्ञों की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए गए।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शिक्षकों की कमी के कारण नियमित कक्षाएं और व्यावहारिक संगीत प्रशिक्षण प्रभावित हो रहे हैं। भरतनाट्यम विभाग में मृदंगम शिक्षक की लंबे समय से कमी, वोकल शिक्षक के रिक्त पद और पर्याप्त संगतकार उपलब्ध नहीं होने जैसे मुद्दे भी उठाए गए। छात्रों ने आवश्यक वाद्ययंत्र, माइक्रोफोन, ध्वनि व्यवस्था, अभ्यास कक्ष और मंच की सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
अंकसूची, छात्रवृत्ति और शुल्क व्यवस्था में सुधार की मांगछात्रों ने अंकसूचियों में नाम और अन्य विवरणों की त्रुटियों, परिणाम जारी करने में देरी तथा शैक्षणिक दस्तावेजों में सुधार की प्रक्रिया को लेकर भी शिकायतें रखीं। उनका कहना है कि इन समस्याओं के कारण विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार और छात्रवृत्ति संबंधी प्रक्रियाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
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ज्ञापन में विभिन्न शैक्षणिक प्रपत्रों के लिए शुल्क, प्रत्येक सेमेस्टर में लिए जाने वाले शुल्कों की पारदर्शिता, पहचान-पत्र जारी करने और त्रश्व, स्श्वष्ट एवं ङ्क्रष्ट पाठ्यक्रमों की समय-सारणी में टकराव जैसी समस्याओं के समाधान की मांग की गई है। दूर-दराज से आने वाले विद्यार्थियों की सुविधा के लिए प्रवेश प्रक्रिया को अधिक से अधिक ऑनलाइन करने का सुझाव भी दिया गया है।शोध प्रक्रिया और पूर्व कार्यकाल से जुड़े मामलों की जांच की मांगप्रदर्शनकारी छात्रों ने शोधार्थियों के पंजीयन, शोध निर्देशन, शोधार्थियों के स्थानांतरण और सेवानिवृत्ति के बाद भी शोध निर्देशन जारी रहने से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच कराने की मांग की।
इसके साथ रायगढ़ चक्रधर समारोह, यात्रा मानदेय, निरीक्षण दलों के गठन, विश्वविद्यालय की वेबसाइट और जनसंपर्क व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए।छात्रों ने कुलपति के पूर्व कार्यकाल से जुड़े वर्ष 2018 के विवाद की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और वर्ष 2025 में उनकी नियुक्ति के समय उठे विरोध से संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल कराने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया है कि जांच किसी सक्षम एवं स्वतंत्र प्राधिकारी से कराई जाए और अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
कुलपति बोलीं—विद्यार्थियों की जायज जरूरतें प्राथमिकताकुलपति डॉ. लवली शर्मा ने लल्लूराम डॉट कॉम से बातचीत में धरना-प्रदर्शन को लेकर अलग पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि कोई धरना-प्रदर्शन नहीं था और कुछ शिक्षकों का स्वार्थ पूरा नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को उकसाया गया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी ही विश्वविद्यालय का आधार हैं और उनकी जायज जरूरतें उनकी प्राथमिकता हैं।
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कुलपति के अनुसार, उन्हें 40 से 45 विद्यार्थियों की अंकसूची नहीं होने के कारण छात्रवृत्ति रुकने की जानकारी मिली थी। सूची मिलने के बाद उन्होंने रातभर काम करवाकर सुबह ही संबंधित विद्यार्थियों तक अंकसूचियां पहुंचवा दीं। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों की मांगों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाएगा और जो मांगें उचित हैं तथा जिन पर कार्रवाई संभव है, उन्हें पूरा करने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
छात्रों ने 8 अक्टूबर 2026 को सौंपे गए ज्ञापन में शिकायतों की निष्पक्ष जांच, शैक्षणिक हितों की रक्षा और शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक अंतरिम व्यवस्था करने की मांग की है। फिलहाल, छात्रों के आरोपों और कुलपति के जवाब के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से सभी 18 मांगों पर विस्तृत कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
