मुंबई। रक्षाबंधन भाई-बहन के उस खास रिश्ते का त्योहार है, जो प्यार, हंसी-मजाक, बचपन की यादों और हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहने के वादे से जुड़ा होता है। समय के साथ त्योहार मनाने के तरीके जरूर बदल सकते हैं, लेकिन इस रिश्ते की भावनाएं हमेशा वैसी ही रहती हैं। इस रक्षाबंधन पर सोनी सब के कलाकारों तोरल रसपुत्रा, समृद्ध बावा, इकबाल खान, नितिन बाबू, मनीष वाधवा और मुस्कान बामने ने अपने भाई-बहनों के साथ जुड़ी ऐसी ही खास यादें साझा कीं, जो उनके लिए इस त्योहार को और भी खास बनाती हैं।
‘यादें’ में डॉ. देव मेहता का किरदार निभा रहे इकबाल खान ने बताया कि उनकी बहनें हमेशा उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रही हैं। उन्होंने अपने स्कूल के दिनों से जुड़ी एक खास रक्षाबंधन परंपरा का जिक्र करते हुए बताया कि उनकी थिएटर टीचर श्रीमती अरुणा आहलूवालिया की बेटी किस्मत आहलूवालिया, जो स्कूल में उनसे सीनियर थीं, कई वर्षों से उन्हें राखी भेजती आ रही हैं। हांगकांग में रहने के बावजूद वह हर साल उन्हें राखी भेजती हैं और इकबाल ने इन राखियों को संभालकर रखा है। उनके लिए यह परंपरा भाई-बहन के रिश्ते में दूरी के बावजूद कायम रहने वाले प्यार और अपनापन की खूबसूरत मिसाल है।
‘हस्तिनापुर के वीर’ में कुंती का किरदार निभा रहीं तोरल रसपुत्रा ने कहा कि उनके लिए रक्षाबंधन किसी तोहफे से ज्यादा उससे जुड़ी भावनाओं का त्योहार है। उन्होंने बताया कि बचपन में कलाई पर बंधा एक साधारण धागा भी प्यार, देखभाल और हमेशा साथ रहने का वादा महसूस होता था। उनके भाई द्वारा दिया गया एक नेकलेस आज भी उनके लिए बेहद खास है, जिसे वह अब भी पहनती हैं। वहीं ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में अश्विन का किरदार निभा रहे समृद्ध बावा ने बताया कि अलग शहर में रहने के बावजूद उनकी बहनें यह सुनिश्चित करती हैं कि वह रक्षाबंधन को कभी मिस न करें। वे उन्हें राखियां डाक से भेजती हैं और वह किसी दोस्त से अपनी कलाई पर राखी बंधवाते हैं। इसके बाद उनकी बहनें उनसे लंच या डिनर की ट्रीट भी लेती हैं। उनके लिए दूरी के बावजूद इस त्योहार को खास बनाए रखना ही भाई-बहन के रिश्ते की खूबसूरती है।
‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में चिराग का किरदार निभा रहे नितिन बाबू ने कहा कि उनके लिए राखी कभी सिर्फ एक धागा या तोहफा नहीं रही, बल्कि इसमें सालों की यादें, प्यार और हमेशा साथ रहने का अनकहा वादा जुड़ा है। वह आज भी अपने भाई-बहनों की छोटी-छोटी राखियां और बचपन के तोहफे संभालकर रखते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बहन ने उन्हें एक जैकेट दी थी, जिसे वह आज भी पहनते हैं। ‘हस्तिनापुर के वीर’ में भीष्म पितामह की भूमिका निभा रहे मनीष वाधवा ने भी बचपन की यादों को साझा करते हुए बताया कि उनकी बहन ने एक बार हाथ से बनी राखी उन्हें बांधी थी, जिसे उन्होंने आज तक संभालकर रखा है। आज व्यस्त जिंदगी और दूरी के बावजूद उनका रिश्ता पहले जैसा ही मजबूत है। उन्होंने बताया कि हर साल वह ‘गोलगप्पे वाला भैया’ बनकर अपनी बहन और परिवार के लिए चाट बनाते हैं।
वहीं ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में शनाया का किरदार निभा रहीं मुस्कान बामने ने कहा कि भाई-बहन एक-दूसरे को उस तरह जानते हैं, जिस तरह शायद कोई और नहीं जान सकता। उनके बीच छोटी-छोटी बातों पर बहस और झगड़े होते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं। उन्होंने बताया कि उनके भाई उन्हें पेंटिंग के शौक को देखते हुए रंगीन पेन, मार्कर और हाईलाइटर जैसी स्टेशनरी देते हैं। इन कलाकारों की यादों से साफ है कि रक्षाबंधन सिर्फ राखी बांधने और तोहफे देने का त्योहार नहीं, बल्कि उन रिश्तों को याद करने का दिन है जो समय और दूरी के साथ भी कभी कमजोर नहीं पड़ते।
