नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। भारतीय रिजर्व बैंक के सख्त मौद्रिक नीति के संकेत और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें इसका मुख्य कारण रहीं। विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी से भी बाजार का माहौल खराब हुआ। हालांकि,डॉलर के मुकाबले रुपया 10 पैसे मजबूत होकर 96.65 पर पहुंच गया।
शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स 357.67 अंक गिरकर 72,281.03 पर पहुंच गया। निफ्टी भी 108.80 अंक की गिरावट के साथ 22,494.25 पर आ गया। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में आईटीसी, अदाणी पोर्ट्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व और इंटरग्लोब एविएशन प्रमुख रूप से नुकसान में रहीं। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा और इंफोसिस लाभ में रहे। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 2.02 फीसदी बढ़कर 102.2 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 6,121.37 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।
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क्या है आरबीआई का सख्त रुख?:
भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को अपनी बेंचमार्क रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया। यह लगभग चार साल में पहली वृद्धि है। आरबीआई ने संकेत दिया कि निकट भविष्य में दर में कटौती की कोई संभावना नहीं है। इसके बजाय बढ़ती महंगाई, कमजोर रुपया और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण आगे और वृद्धि हो सकती है। आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने रेपो दर बढ़ाने के लिए सर्वसम्मति से मतदान किया। समिति ने अपनी नीतिगत स्थिति को “तटस्थ” से “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” में बदल दिया। एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर ने कहा कि आरबीआई की दर वृद्धि के बाद भारतीय शेयरों के लिए दृष्टिकोण सतर्क बना हुआ है।
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रुपये पर क्यों है दबाव, फिर भी कैसे हुई मजबूती?:
रुपया गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 10 पैसे बढ़कर 96.65 पर पहुंच गया। यह भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप के कारण हुआ। हालांकि, रुपया लगातार व्यापक आर्थिक चुनौतियों के कारण दबाव में है। इनमें वैश्विक डॉलर की मजबूती और ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतें शामिल हैं। विदेशी मुद्रा भंडार में भी तीन हफ्तों में 50 अरब अमेरिकी डॉलर की गिरावट आई है। फाइनरेक्स के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, डॉलर की मजबूत कॉर्पोरेट आयातक मांग और सुरक्षित-निवेश पूंजी के बदलाव ने आरबीआई की नीति को कमजोर किया। गवर्नर ने रुपये को उसके सही मूल्य पर लाने में मदद करने का आश्वासन दिया है।
वैश्विक और घरेलू बाजार का क्या है हाल?:
एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 इंडेक्स, शंघाई का एस.एस.ई. कंपोजिट इंडेक्स और हैंग सेंग इंडेक्स सभी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। बुधवार को अमेरिकी बाजार भी निचले स्तर पर बंद हुए थे। एच.एस.टी. वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिसिल्वन राधाकृष्णन ने कहा कि अब केवल आरबीआई की दर वृद्धि ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक सख्त घरेलू और वैश्विक मौद्रिक स्थितियों की संभावना भी एक बड़ी चिंता है। फेडरल रिजर्व के मिनट्स भी अमेरिकी दर वृद्धि की ओर इशारा करते हैं।
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