रायपुर में संवाद से समाधान कार्यक्रम, पुलिस ने छात्रों और महिलाओं को नए कानून

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रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट द्वारा आम नागरिकों को कानून, सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में थाना उरला पुलिस द्वारा रायपुर पब्लिक स्कूल, उरला में ‘संवाद से समाधान’ जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से छात्र-छात्राओं, महिलाओं और विद्यालय स्टाफ को नए आपराधिक कानून, साइबर सुरक्षा, महिला सुरक्षा और पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर जोन की डीसीपी दीपमाला कश्यप उपस्थित रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कानून और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान 150 से अधिक छात्र-छात्राओं, महिलाओं और विद्यालय स्टाफ ने कार्यक्रम में भाग लिया। अपने संबोधन में डीसीपी दीपमाला कश्यप ने नए आपराधिक कानूनों के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों और उनके महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि नए कानूनों का उद्देश्य न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिकों के लिए आसान बनाना है।

कार्यक्रम में साइबर अपराधों से बचाव को लेकर भी विशेष जानकारी दी गई। डीसीपी ने विद्यार्थियों और महिलाओं को साइबर फ्रॉड, फर्जी लिंक, ओटीपी धोखाधड़ी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव, ऑनलाइन गेमिंग और साइबर बुलिंग जैसे अपराधों से सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल माध्यमों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में नागरिकों को अपनी निजी और गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना पासवर्ड, बैंक संबंधी जानकारी, ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। साथ ही किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।

डीसीपी ने सोशल मीडिया के सुरक्षित और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ज्ञान और संवाद का बेहतर माध्यम है, लेकिन इसका गलत उपयोग कई बार अपराध का कारण बन सकता है। इसलिए युवाओं को सतर्क रहकर सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग करना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली की कार्यप्रणाली के बारे में भी जानकारी दी गई। डीसीपी ने बताया कि कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने से कानून व्यवस्था को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाया गया है। इसके माध्यम से नागरिकों को बेहतर पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराने और अपराधों पर तेजी से नियंत्रण करने में मदद मिल रही है।

महिला सुरक्षा के विषय पर भी कार्यक्रम में विशेष चर्चा की गई। छात्राओं और महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों, महिला अपराधों से जुड़े नए प्रावधानों और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में बताया गया। डीसीपी ने कहा कि किसी भी प्रकार की परेशानी या अपराध की स्थिति में महिलाएं बिना डर के पुलिस से संपर्क करें। पुलिस उनकी सहायता और सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर है। इस अवसर पर विभिन्न आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जरूरत पड़ने पर नागरिक इन नंबरों के माध्यम से तत्काल सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इनमें साइबर अपराध के लिए 1930, महिला हेल्पलाइन के लिए 181, चाइल्ड हेल्पलाइन के लिए 1098 और आपातकालीन पुलिस, एंबुलेंस एवं फायर सेवा के लिए 112 नंबर की जानकारी दी गई। इसके अलावा पिंक पेट्रोलिंग यूनिट हेल्पलाइन/व्हाट्सएप नंबर 94792-10932 के बारे में भी उपस्थित लोगों को बताया गया। पुलिस ने लोगों से अपील की कि किसी भी अपराध या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने नए कानूनों, साइबर सुरक्षा, महिला सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था से जुड़े कई सवाल पूछे। डीसीपी दीपमाला कश्यप ने सभी सवालों के जवाब सरल और व्यवहारिक तरीके से दिए। इससे विद्यार्थियों में कानून और सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास और संवाद को मजबूत करना था। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जागरूक नागरिक ही सुरक्षित समाज की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। अपराधों को रोकने के लिए जनता की भागीदारी बेहद जरूरी है। अंत में थाना उरला पुलिस ने सभी उपस्थित लोगों से अपील की कि वे नए कानूनों का पालन करें, सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग करें और किसी भी प्रकार के साइबर अपराध, महिला अपराध या अन्य आपराधिक घटना की जानकारी तुरंत पुलिस या संबंधित हेल्पलाइन पर दें।