मुंबई। रिज़र्व बैंक ने गुरुवार को कहा कि डिजिटल फ्रॉड को रोकने या कम करने के लिए सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच करीबी तालमेल ज़रूरी है। RBI द्वारा 60 बड़े बैंकों के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स और फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट के हेड्स के लिए आयोजित दो दिन की वर्कशॉप बुधवार को खत्म हुई। वर्कशॉप में केंद्रीय गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) और महाराष्ट्र पुलिस के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। आपको बता दें की RBI ने गुरुवार को एक बयान में कहा, “इस तरह के फ्रॉड से पैदा हो रही बढ़ती चिंताओं को असरदार तरीके से दूर करने के लिए सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच करीबी तालमेल की ज़रूरत पर भी (वर्कशॉप में) ज़ोर दिया गया।” इसमें कहा गया कि साइबर-इनेबल्ड फ्रॉड को रोकने और कम करने के लिए मज़बूत गवर्नेंस और ओवरसाइट व्यवस्था, मज़बूत इंटरनल कंट्रोल, अच्छी तरह से तय प्रोसेस और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के महत्व पर ज़ोर दिया गया। सेंट्रल बैंक ने बैंकों से इन कोशिशों के तहत कस्टमर अवेयरनेस ड्राइव चलाने के लिए भी कहा। इसमें कहा गया कि बैंकों ने वर्कशॉप में साइबर-इनेबल्ड फ्रॉड को रोकने और कम करने के लिए अपने द्वारा लागू किए गए बेस्ट प्रैक्टिस और टेक्नोलॉजिकल इनिशिएटिव्स को शेयर किया। इसमें कहा गया कि यह वर्कशॉप, साइबर-इनेबल्ड फ्रॉड के मामलों और उनकी बढ़ती मुश्किलों से निपटने के लिए बैंकों के साथ रिज़र्व बैंक की चल रही सुपरवाइज़री और डेवलपमेंटल बातचीत का हिस्सा थी।
ऑनलाइन लूट से बचने के लिए RBI की नई सलाह: सब मिलकर लड़ेंगे तभी रुकेगा फ्रॉड
