रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के जल संरक्षण और संवर्धन अभियान “मोर गांव, मोर तरिया” के तहत बिलासपुर जिले में तेजी से कार्य किए जा रहे हैं। इस पहल से जहां जल संरक्षण को मजबूती मिल रही है, वहीं ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हो रहे हैं। अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मानसून से पहले जल संरचनाओं को तैयार करने के उद्देश्य से बिलासपुर जिले के जनपद पंचायत मस्तूरी अंतर्गत ग्राम पंचायत बोहारडीह में नए तालाब निर्माण का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। प्रशासन ने विशेष कार्ययोजना बनाकर वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, ताकि बारिश के पानी का अधिकतम संचयन किया जा सके। जल संकट के दीर्घकालिक समाधान के लिए जिले में जल संरचनाओं का विस्तार किया जा रहा है। अभियान के तहत बिलासपुर जिले में 38 नए तालाबों के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इन तालाबों के निर्माण से भू-जल स्तर में सुधार, सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्धता, पशुओं के लिए निस्तारी सुविधा और गर्मियों में जल संकट से राहत मिलने की उम्मीद है। यह अभियान ग्रामीणों के लिए दोहरा लाभ लेकर आया है। एक ओर गांवों में स्थायी जल स्रोत तैयार हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निर्माण कार्यों में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है। गांव में ही काम मिलने से पलायन में कमी आई है और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। प्रशासन द्वारा सभी निर्माण स्थलों की नियमित निगरानी की जा रही है, ताकि कार्यों की गुणवत्ता बनी रहे और सभी परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी हो सकें। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान आने वाले वर्षों में जल संरक्षण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने में अहम साबित होगा।
‘मोर गांव, मोर तरिया’ अभियान बना ग्रामीण विकास की मिसाल, जल संरक्षण के साथ मिल रहा रोजगार
