प्रणित मोरे विवाद पर महाराष्ट्र सरकार सख्त, सोशल मीडिया कंटेंट की जांच के आदेश

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मुंबई। स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे से जुड़े विवाद पर महाराष्ट्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। चर्चित ‘370 रुपये की बिरयानी’ टिप्पणी मामले के बाद सरकार ने प्रणित मोरे और मामले से जुड़े अन्य लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट्स व डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद वीडियो कंटेंट की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। विवाद तब शुरू हुआ जब प्रणित मोरे के शो का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में हिमांशु जांगड़ा नामक व्यक्ति ने मजाक में कहा था कि डेट पर बिरयानी पर 370 रुपये खर्च करने के कारण वह शारीरिक संबंध बनाने का हकदार महसूस करता है। इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

वहीं एक अन्य वायरल क्लिप में एमबीबीएस छात्रा सेजल पवार शवों से जुड़े अनुभव साझा करती नजर आईं। उनके बयान और उस दौरान प्रणित मोरे की प्रतिक्रिया को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। मामले के बाद प्रणित मोरे ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि यदि उनकी बातों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका खेद है। वहीं हिमांशु जांगड़ा और सेजल पवार ने भी अपने बयानों पर अफसोस जताते हुए माफी मांगी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने कथित अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री को लेकर प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा, सेजल पवार और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच एजेंसियां अब सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट की समीक्षा कर रही हैं। विवाद के बाद हिमांशु जांगड़ा को उनकी नौकरी से हटा दिया गया है। वहीं सेठ जी.एस. मेडिकल कॉलेज एवं केईएम अस्पताल से जुड़ी सेजल पवार को 15 दिनों की अनिवार्य छुट्टी पर भेजा गया है।