महासमुंद। जिले में अवैध प्लाटिंग का बड़ा मामला सामने आया है, जहां प्रशासनिक लापरवाही का फायदा उठाकर जमीन को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर बेच दिया गया। रमनटोला इलाके में केन्द्रीय विद्यालय के पास स्थित भूमि पर 2019 से यह अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही है। दरअसल, खसरा नंबर 1800 की लगभग 2 एकड़ जमीन को बिना किसी वैध लेआउट स्वीकृति के करीब 32 प्लॉट्स में विभाजित कर अलग-अलग लोगों को बेच दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया में नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की अनुमति नहीं ली गई, जिससे यह पूरा निर्माण नियमों के खिलाफ माना जा रहा है।
इस अवैध कॉलोनी में प्लॉट खरीदने वाले लोगों को भविष्य में सड़क, पानी, नाली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की भारी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। चूंकि कॉलोनी का विकास वैधानिक प्रक्रिया के तहत नहीं हुआ है, इसलिए जिम्मेदारी तय करना भी मुश्किल हो जाता है। जांच में यह भी सामने आया है कि, अवैध प्लाटिंग की शुरुआत अक्सर राजस्व विभाग से डायवर्सन प्रक्रिया में खामियों के कारण होती है।

बाद में बिना समन्वय के जमीन को छोटे-छोटे हिस्सों में बेच दिया जाता है। नगर तथा ग्राम निवेश विभाग का कहना है कि, जानकारी समय पर साझा न होने से ऐसे मामले बढ़ रहे हैं। वहीं प्रशासनिक कार्रवाई की धीमी गति के कारण शहर में कई अवैध कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं। यह मामला साफ करता है कि, अगर निगरानी और कार्रवाई में तेजी नहीं लाई गई, तो आम लोग इसी तरह ठगी का शिकार होते रहेंगे।
