बिलासपुर में भारी बारिश का कहर, 5 ट्रेनें रद्द और 3 का बदला रूट

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। गुरुवार रात से शुक्रवार दोपहर तक हुई तेज बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। करीब 20 साल बाद बिलासपुर में इस तरह का जलभराव देखने को मिला है। भारी बारिश के कारण सड़कें, कॉलोनियां और निचले इलाके पानी में डूब गए हैं। कई स्थानों पर लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है।

हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल कदम उठाते हुए स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। वहीं रेलवे ट्रैक पर पानी भरने के कारण रेल यातायात भी प्रभावित हुआ है। बिलासपुर रेल मंडल से गुजरने वाली 5 मेमू (MEMU) ट्रेनों को रद्द करना पड़ा, जबकि 3 ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया गया है। रेलवे और प्रशासन की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। मौसम विभाग के अनुसार, जिले में पिछले 24 घंटे के दौरान औसतन 74.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। वहीं सीपत क्षेत्र में सबसे अधिक 110.2 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। लगातार बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए हैं और निचले इलाकों में पानी तेजी से भर रहा है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है

सरकंडा और चांटीडीह में राहत-बचाव अभियान बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में सरकंडा और चांटीडीह क्षेत्र शामिल हैं। यहां निचले इलाकों में पानी तेजी से भरने के कारण कई परिवार फंस गए। स्थिति को देखते हुए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीम को मौके पर भेजा गया। SDRF की टीम ने दो नावों की मदद से राहत एवं बचाव अभियान चलाया और 40 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। सरकंडा के बंधवापारा क्षेत्र में पानी का स्तर बढ़ने के बाद टीम ने घरों में फंसे लोगों को बाहर निकाला। वहीं दोमुहानी इलाके में 10 से अधिक घर चारों तरफ से पानी से घिर गए थे। कई परिवार पूरी रात अपने घरों में फंसे रहे, जिसके बाद प्रशासन को सूचना दी गई और राहत दल ने पहुंचकर लोगों को सुरक्षित निकाला।

बिजली और पेयजल व्यवस्था पर पड़ा असर
भारी बारिश का असर शहर की बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा है। कई इलाकों में ट्रांसफॉर्मर पानी में डूबने के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। कई क्षेत्रों में घंटों तक ब्लैकआउट जैसी स्थिति बनी रही। बिजली नहीं होने से लोगों को पेयजल की समस्या का भी सामना करना पड़ा। बिजली विभाग की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में पहुंचकर व्यवस्था सुधारने में जुटी हुई हैं। विभाग द्वारा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ स्थानों पर बिजली आपूर्ति बंद रखी गई है, ताकि पानी के कारण किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।

कलेक्टर बंगले में भी भरा पानी
भारी बारिश का असर सरकारी कार्यालयों और प्रशासनिक अधिकारियों के आवासों तक पहुंच गया। बिलासपुर कलेक्टर के सरकारी बंगले में भी बारिश का पानी भर गया। इसके बाद नगर निगम की टीम को जल निकासी के लिए लगाया गया। नगर निगम की मशीनों के माध्यम से लगातार पानी निकालने का काम किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों की स्थिति का जायजा लिया और संबंधित विभागों को तेजी से काम करने के निर्देश दिए।

नेशनल हाईवे पर यातायात प्रभावित
बारिश के कारण बिलासपुर-जांजगीर नेशनल हाईवे पर भी यातायात प्रभावित हुआ। दर्रीघाट के पास सड़क पर पानी भर जाने से वाहनों की लंबी कतार लग गई। कई घंटों तक वाहन चालक परेशान रहे। राहगीरों ने जलभराव के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किए। इसके अलावा अपोलो हॉस्पिटल के पास भी जलभराव के कारण कई लोग फंस गए। सड़क पर पानी भरने से लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी हुई। प्रशासन और स्थानीय लोगों की मदद से धीरे-धीरे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

प्रशासन अलर्ट मोड पर
बारिश रुकने के बाद कई इलाकों में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है, लेकिन प्रशासन अभी भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। नगर निगम, जिला प्रशासन, SDRF और अन्य विभागों की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं। प्रशासन द्वारा लोगों से अपील की गई है कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना दें। साथ ही नदी-नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। बिलासपुर में आई इस बारिश ने एक बार फिर शहर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लंबे समय बाद बने ऐसे हालात ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने पर है।