शनि की साढ़ेसाती: ज्योतिष में शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या की अवधि को चुनौतीपूर्ण समय माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान व्यक्ति को स्वास्थ्य, मानसिक तनाव, कामकाज और आर्थिक मामलों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे समय में धैर्य और संयम के साथ शनिदेव की पूजा करना शुभ माना जाता है। हालांकि, रोजाना शनिदेव की विधि-विधान से पूजा करने और कुछ विशेष उपाय करने से उनकी कृपा प्राप्त होने की कामना की जाती है। मान्यता है कि, शनिदेव को सरसों का तेल, काले तिल और एक सिक्का अर्पित करने से वह प्रसन्न होते हैं और साढ़ेसाती व ढैय्या के प्रभाव को कम करने की कामना की जाती है। इसके अलावा शनिदेव के 108 नामों का जाप करना भी विशेष फलदायी माना जाता है। श्रद्धापूर्वक मंत्र, 108 नामों का जाप और पूजा करने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति में सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है। ऐसे में साढ़ेसाती या ढैय्या के प्रभाव से गुजर रहे लोग इस आसान उपाय को कर सकते हैं।
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शनि देव 108 नाम:
- घन
- सौम्य
- शरण्य
- सर्वाभीष्टप्रदायिन्
- सुरवन्द्य
- शनैश्चर
- सुरलोकविहारिण्
- सुखासनोपविष्ट
- सुंदर
- शांत
- घनरूप
- घनाभरणधारिण्
- घनसारविलेप
- खद्योत
- मन्द
- वरेण्य
- सर्वेश
- मन्दचेष्ट
- महनीयगुणात्मन्
- मर्त्यपावनपद
- महेश
- छायापुत्र
- शर्व
- शततूणीरधारिण्
- चरस्थिरस्वभाव
- अचञ्चल
- नीलवर्ण
- नित्य
- नीलाञ्जननिभ
- नीलाम्बरविभूशण
- निश्चल
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- वेद्य
- विधिरूप
- विरोधाधारभूमी
- भेदास्पदस्वभाव
- वज्रदेह
- वैराग्यद
- वीर
- वीतरोगभय
- विज्ञापन
- विपत्परम्परेश
- विश्ववन्द्य
- गृध्नवाह
- गूढ
- कूर्माङ्ग
- कुरूपिण्
- कुत्सित
- गुणाढ्य
- गोचर
- आयुष्यकारण
- आपदुद्धर्त्र
- विष्णुभक्त
- वशिन्
- अविद्यामूलनाश
- विद्याविद्यास्वरूपिण्
- विविधागमवेदिन्
- विधिस्तुत्य
- वन्द्य
- विरूपाक्ष
- वरिष्ठ
- गरिष्ठ
- वज्राङ्कुशधर
- वरदाभयहस्त
- वामन
- ज्येष्ठापत्नीसमेत
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- श्रेष्ठ
- मितभाषिण्
- कष्टौघनाशकर्त्र
- पुष्टिद
- स्तुत्य
- स्तोत्रगम्य
- भक्तिवश्य
- अशेषजनवन्द्य
- विशेषफलदायिन्
- भानु
- भानुपुत्र
- भव्य
- पावन
- धनुर्मण्डलसंस्था
- धनदा
- धनुष्मत्
- तनुप्रकाशदेह
- तामस
- वशीकृतजनेश
- पशूनां पति
- खेचर
- घननीलाम्बर
- काठिन्यमानस
- आर्यगणस्तुत्य
- नीलच्छत्र
- नित्य
- निर्गुण
- गुणात्मन्
- निन्द्य
- वन्दनीय
- धीर
- दिव्यदेह
- दीनार्तिहरण
- क्रूर
- क्रूरचेष्ट
- दैन्यनाशकराय
- आर्यजनगण्य
- कामक्रोधकर
- कलत्रपुत्रशत्रुत्वकारण
- परिपोषितभक्त
- परभीतिहर
- भक्तसंघमनोऽभीष्टफलद
- निरामय
- शनि
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