कोलकाता में करोड़ों के चिटफंड मामले में ईडी की छह ठिकानों पर छापेमारी

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कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय ने करोड़ों रुपये के कथित चिटफंड मामले में बुधवार को कोलकाता में छह स्थानों पर एक साथ छापेमारी कर तलाशी अभियान चलाया। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के साथ प्रवर्तन निदेशालय की एक टीम सुबह करीब सात बजे उत्तर कोलकाता के नारकेलडांगा इलाके में एक कारोबारी के आवास पर पहुंची।

जांच के अनुसार, संबंधित कारोबारी ने बेहतर रिटर्न का वादा कर लोगों से रकम जमा कराई और बाद में उसे विभिन्न क्षेत्रों में निवेश किया। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय की पांच अन्य टीमों ने इसी चिटफंड मामले के सिलसिले में उत्तर और दक्षिण कोलकाता के पांच अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी की। सूत्रों ने बताया कि लोगों से जमा की गई रकम एपीएम समूह नामक कथित पोंजी कंपनी के नाम पर जुटाई गई थी। आरोप है कि कंपनी ने लोगों से धन एकत्र करने के बाद उसे अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश किया। यह निवेश एक अन्य कॉरपोरेट कंपनी के माध्यम से किया गया, जिसके बारे में जांच एजेंसियों को संदेह है कि वह मुख्य रूप से एक मुखौटा कंपनी के रूप में काम करती थी।

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छापेमारी और तलाशी अभियान चिटफंड योजना में जमा धन के कथित दुरुपयोग और गबन के आरोपों की जांच के तहत किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कथित पोंजी इकाई के मालिक के आवास के अलावा उससे जुड़े लोगों और कथित संपर्क सूत्रों के ठिकानों पर भी तलाशी ली जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, कथित धोखाधड़ी का तरीका एक जैसा था। पहले अलग-अलग बहुस्तरीय विपणन योजनाओं के माध्यम से लोगों से बड़ी रकम जमा कराई जाती थी। निवेशकों को उनकी जमा राशि पर आकर्षक रिटर्न देने का भरोसा दिलाया जाता था। इसके बाद जुटाई गई रकम को एक कथित मुखौटा कंपनी के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश किया जाता था।

जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि लोगों से जमा की गई रकम संबंधित नियामक प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति या वैध प्राधिकार प्राप्त किए बिना जुटाई गई थी। वर्ष 2012 के बाद से पश्चिम बंगाल में कई बड़े पोंजी और चिटफंड मामलों की जांच सामने आई है। इनमें सुदीप्तो सेन के स्वामित्व वाला सारदा समूह और गौतम कुंडू के स्वामित्व वाला रोज वैली समूह प्रमुख रहे हैं।

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प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो लंबे समय से ऐसी कई संस्थाओं की गतिविधियों की अलग-अलग मामलों में जांच कर रहे हैं। इन मामलों के सिलसिले में तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। हालांकि, मौजूदा मामले में छापेमारी के दौरान क्या बरामद हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी जांच एजेंसी की ओर से अभी सामने नहीं आई है।