यूपीआई पर शुल्क लगाने का फैसला वापस ले सरकार : भाकपा

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पटना। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राज्य सचिव राम नरेश पांडेय ने यूपीआई के इस्तेमाल पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर चिंता जताते हुए सरकार से इस फैसले को वापस लेने और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सुविधाजनक बनाए रखने की मांग की है।

भाकपा के राज्य सचिव ने कहा कि सरकार का कहना है कि यूपीआई के इस्तेमाल पर ग्राहकों से सीधे शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन शुल्क बढ़ने की स्थिति में व्यापारियों पर पड़ने वाला अतिरिक्त खर्च अंततः ग्राहकों तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि भुगतान की राशि बढ़ने से हर मामले में प्रसंस्करण लागत उसी अनुपात में नहीं बढ़ती है। इसलिए शुल्क लगाने के निर्णय की समीक्षा की जानी चाहिए।

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पांडेय ने कहा कि यूपीआई को देश में सरल, परस्पर उपयोग योग्य और कम लागत वाली डिजिटल भुगतान व्यवस्था के रूप में विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था पर किसी प्रकार का शुल्क लगाने से छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

भाकपा के राज्य सचिव ने दावा किया कि भारत की यूपीआई और जीरो-एमडीआर व्यवस्था को लेकर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की ओर से पहले भी आपत्तियां जताई गई हैं। उन्होंने कहा कि इस पृष्ठभूमि में सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि देश की डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़े फैसले भारत के हितों और घरेलू डिजिटल बुनियादी ढांचे को ध्यान में रखकर लिए जाएं।

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पांडेय ने कहा कि यूपीआई को सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे के रूप में विकसित किया गया है और इसकी पहुंच तथा कम लागत वाली सुविधा को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने सरकार से यूपीआई से संबंधित शुल्क के फैसले की समीक्षा कर इसे आम उपभोक्ताओं और व्यापारियों के लिए सुलभ बनाए रखने की मांग की।