छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका बोले— सस्ती दवाएं और ग्रामीणों तक इलाज पहुंचाना जरूरी, नकली दवाओं पर हो सख्ती

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने, ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और नकली दवाओं पर रोक लगाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा को केवल कारोबार तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इन्हें समाजसेवा का माध्यम बनाया जाना चाहिए। इन चुनौतियों से निपटने के लिए चिकित्सकों, फार्मासिस्टों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को मिलकर काम करना होगा।

राज्यपाल पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में एसोसिएशन ऑफ फार्मास्यूटिकल टीचर्स ऑफ इंडिया (एपीटीआई) के 28वें राष्ट्रीय अधिवेशन एपिकॉन-2026 को संबोधित कर रहे थे। अधिवेशन की थीम आत्मनिर्भर भारत के लिए सक्षम फार्मासिस्ट तैयार करने पर केंद्रित रही। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में प्रगति के बावजूद ग्रामीण आबादी तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना चुनौती है। दवाओं की कीमतें आम लोगों की पहुंच में होनी चाहिए और चिकित्सकों को मरीजों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रभावी एवं किफायती दवाओं के विकल्पों पर विचार करना चाहिए।

राज्यपाल ने जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने गर्भवती महिलाओं, माताओं और नवजात शिशुओं की देखभाल पर विशेष ध्यान देने की बात कही। साथ ही, छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदायों, विशेषकर बैगा समुदाय के पास मौजूद औषधीय पौधों और पारंपरिक उपचार पद्धतियों से जुड़े ज्ञान का वैज्ञानिक अध्ययन एवं दस्तावेजीकरण करने पर जोर दिया।

नकली दवाओं को मरीजों की सेहत और जीवन के लिए गंभीर खतरा बताते हुए राज्यपाल ने दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने फार्मेसी के विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इंटरनेट का उपयोग ज्ञान बढ़ाने के लिए करने तथा वैज्ञानिक सोच और नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देने की सलाह दी। कार्यक्रम में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. मोंटू एम. पटेल, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला और एपीटीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मिलिंद जनराव उमेकऱ सहित अन्य वक्ताओं ने भी विचार रखे। अधिवेशन में देशभर से शिक्षक, विद्यार्थी और फार्मा उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों सहित करीब 1,800 लोगों ने भाग लिया।