बृजमोहन अग्रवाल ने एस्टिमेट्स कमेटी में उठाई छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी की मांग

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नई दिल्ली/रायपुर। रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसद भवन एनेक्सी में आयोजित लोकसभा की एस्टिमेट्स कमेटी की बैठक में छत्तीसगढ़ के बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की ओर से देश में नई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर दी गई प्रस्तुति के दौरान छत्तीसगढ़ के लिए बेहतर सड़क नेटवर्क, औद्योगिक विकास और सीधे पोर्ट कनेक्टिविटी कॉरिडोर की आवश्यकता पर जोर दिया।

बैठक में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक लैंडलॉक्ड यानी भू-आबद्ध राज्य है। ऐसे में राज्य के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को विशाखापट्टनम और पारादीप जैसे प्रमुख बंदरगाहों से जोड़ने के लिए एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर का निर्माण बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से राज्य के उद्योगों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी और परिवहन लागत में भी कमी आएगी। सांसद ने बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों और हाई-स्पीड कॉरिडोर के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए।

उन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य में हाई-स्पीड कॉरिडोर और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए आवंटित राशि और वास्तविक खर्च का विस्तृत ब्यौरा मांगा। उन्होंने वर्ष 2014 से पहले और वर्तमान समय में राज्य के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की स्थिति की तुलना करते हुए जानकारी मांगी। सांसद ने पूछा कि वर्ष 2014 के बाद छत्तीसगढ़ में कितने नए राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण हुआ है और भविष्य में किन प्रमुख कॉरिडोर को विकसित करने की योजना है। बृजमोहन अग्रवाल ने राज्य के शहरों में बढ़ती भीड़ और यातायात दबाव को कम करने के लिए भी कई सुझाव दिए। उन्होंने पुलों के निर्माण और पुनर्वास, रिंग रोड, बाईपास परियोजनाओं और शहरी डीकंजेशन नीति के तहत बड़े शहरों को प्राथमिकता देने की स्थिति की जानकारी मांगी।

उन्होंने कहा कि एक लाख और पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में बेहतर यातायात व्यवस्था के लिए विशेष योजनाओं की जरूरत है। इससे शहरों में जाम की समस्या कम होगी और लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा मिल सकेगी। बैठक में सांसद ने औद्योगिक विकास से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने DPIIT द्वारा चिन्हित 20 NICDC नोड्स और स्मार्ट सिटी योजना में छत्तीसगढ़ की भागीदारी की स्थिति पर जानकारी मांगी। इसके अलावा राज्य में दो लेन से चार लेन और चार लेन से छह लेन किए गए राष्ट्रीय राजमार्गों की प्रगति की जानकारी भी मांगी गई।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सड़क विकास को केवल परिवहन सुविधा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे औद्योगिक विकास, रोजगार और सुरक्षा से जोड़कर देखना होगा। उन्होंने विशेष रूप से बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों में बेहतर सड़क नेटवर्क से आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। सड़कें इन क्षेत्रों के विकास का मुख्य आधार बन सकती हैं।

सांसद ने औद्योगिक निवेश में क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने, पिछड़े इलाकों के लिए संस्थागत रियायती ऋण उपलब्ध कराने और राजमार्गों के आसपास उपलब्ध अतिरिक्त भूमि के व्यावसायिक उपयोग से राजस्व बढ़ाने जैसे सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में खनिज, उद्योग और प्राकृतिक संसाधनों की अपार संभावनाएं हैं। यदि राज्य को बेहतर बंदरगाह कनेक्टिविटी और आधुनिक सड़क नेटवर्क उपलब्ध कराया जाए तो यह मध्य भारत का बड़ा औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब बन सकता है। बैठक में सांसद द्वारा उठाए गए मुद्दों को छत्तीसगढ़ के दीर्घकालीन विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उनका कहना है कि केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय से सड़क एवं परिवहन क्षेत्र में बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।