लालबाग में बस्तर दशहरा प्रदर्शनी में परंपरा और आधुनिकता का सजीव संगम रेखांकित

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जगदलपुर । लालबाग मैदान में बस्तर दशहरा पर्व के अवसर पर बस्तर दशहरा की समृद्ध लोक-संस्कृति और सदियों पुरानी परंपराओं का अद्भुत और जीवंत रूप बस्तर दशहरा उत्सव प्रदर्शनी में साकार हुआ। पारंपरिक रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों के गहरे ताने-बाने को उजागर करने के उद्देश्य से तैयार की गई बस्तर दशहरा पर्व पर आधारित विशेष प्रदर्शनी में सजीव प्रस्तुतियों के साथ ही विभिन्न स्टॉल में बस्तर दशहरा पर्व के पूजा विधानों तथा देव विग्रह को प्रतीकात्मक तौर पर शामिल गया है, जिसमें आधुनिक तकनीक के माध्यम से चित्रों को प्रदर्शित किया गया है साथ ही इन पूजा विधानों एवं अनुष्ठानों के बारे में पारंपरिक जानकारी को रेखांकित किया गया है।

इस प्रदर्शनी स्थल पर प्रवेश करते ही स्थापित की गई विशेष प्रदर्शनी पट्टिकाएं आगंतुकों के लिए ज्ञान और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी रहीं। इन पट्टिकाओं में बस्तर दशहरा की सदियों पुरानी रस्मों के चित्र संजोए गए हैं, जिनके साथ उनके ऐतिहासिक महत्व से लेकर वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उनका सुव्यवस्थित ब्योरा दर्ज है। प्रदर्शनी की औपचारिक शुरुआत से पूर्व ही उक्त सुव्यवस्थित छायाचित्र और सूचनात्मक पट्टिकायें उपस्थित जनसमूह को बस्तर की लोक-परंपराओं की मूल पृष्ठभूमि से दृश्यात्मक रूप से जोड़ रही हैं । प्रदर्शनी आरंभ होने पर पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोक कलाकारों द्वारा भी बस्तर की पारंपरिक लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। बस्तर पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और लोक कलाकारों के सजीव प्रस्तुति भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केन्द्र रही। जो बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक और पारंपरिक आयोजनों को जीवंत ढंग से रेखांकित करती है।

राष्ट्रपति ने मुरिया दरबार में पारंपरिक नेतृत्वकर्ताओं से किया संवाद
सिरहासार भवन में परंपरा और गरिमा के अनुरूप हुआ मुरिया दरबार का आयोजन, मांझी-चालकी सहित अन्य सदस्यों ने

साझा किया इतिहास और अनुभव*
बस्तर दशहरा पर्व का ऐतिहादिक एवं महत्वपूर्ण आयोजन मुरिया दरबार- बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विशिष्ट लोकतांत्रिक परंपराओं के प्रतीक मुरिया दरबार का आयोजन निर्धारित सिरहासार भवन में ही पूरी परंपरा और गरिमा के अनुरूप किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर के पारंपरिक सामाजिक नेतृत्वकर्ताओं मांझी -चालकी,मेम्बर-मेम्बरिन, नाईक-पाईक सहित अन्य सदस्यों से आत्मीय मुलाकात कर संवाद किया।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने पारंपरिक नेतृत्वकर्ताओं से रूबरू होकर बस्तर की विशिष्ट सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से जाना। इस दौरान मांझी-चालकी और अन्य सदस्यों ने मुरिया दरबार के ऐतिहासिक महत्व, इसकी परंपराओं और बस्तर के सामाजिक जीवन में इसकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने अपने अनुभव भी साझा किए और इस ऐतिहासिक परंपरा से जुड़े विभिन्न पहलुओं से राष्ट्रपति को अवगत कराया।मुरिया दरबार बस्तर की ऐसी विशिष्ट परंपरा है, जो जनभागीदारी, सामूहिक विचार-विमर्श और पारंपरिक नेतृत्व व्यवस्था की पहचान रही है। सिरहासार भवन में आयोजित इस मुरिया दरबार ने बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और परंपरागत सामाजिक व्यवस्था की विशिष्टता को रेखांकित किया।राष्ट्रपति द्रौपदी मुम्र्मु के साथ पारंपरिक सामाजिक नेतृत्वकर्ताओं का यह आत्मीय संवाद बस्तर की लोकसंस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और जनजातीय परंपराओं के प्रति सम्मान का महत्वपूर्ण अवसर रहा।