राज्योत्सव में विज्ञान एवं तकनीक की प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र, मिलेट्स पर कैंसर रोधी अनुसंधान से लेकर ड्रोन तकनीक तक की झलक

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रायपुर। नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की प्रदर्शनी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहां खगोल विज्ञान, औषधीय अनुसंधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक और ग्रामीण विकास से जुड़े नवाचारों को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी के जरिए लोगों को वैज्ञानिक घटनाओं और आधुनिक तकनीक की उपयोगिता से परिचित कराया जा रहा है।

सूरजपुर जिले की प्रतापपुर तहसील के ग्राम मायापुर में कर्क रेखा पर एस्ट्रो साइंस सेंटर प्रस्तावित है। यहां शून्य छाया दिवस यानी जीरो शैडो डे की खगोलीय घटना को समझने का अवसर मिलेगा। इस दौरान स्थानीय सौर दोपहर में सूर्य सिर के ठीक ऊपर होने के कारण सीधी खड़ी वस्तु की छाया लगभग गायब हो जाती है। प्रदर्शनी में प्रदेश के सभी 33 जिलों में इस घटना की संभावित तिथियों और समय की जानकारी भी दी गई है।

प्रदर्शनी में रागी, कोदो और बाजरा जैसे मोटे अनाजों में मौजूद जैव-सक्रिय तत्वों पर चल रहे अनुसंधान को भी प्रमुखता से दिखाया गया है। प्रारंभिक फाइटोकेमिकल जांच में रागी और कोदो के अर्क में एल्कलॉइड्स, फ्लेवोनॉइड्स, फिनोलिक यौगिक, टैनिन्स और फाइटोस्टेरॉल्स सहित सात प्रकार के घटकों की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। इनके संभावित कैंसर रोधी गुणों का वैज्ञानिक परीक्षण किया जा रहा है, जिससे भविष्य में औषधि विकास की नई संभावनाएं तलाशने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा बिलासपुर, कबीरधाम, धमतरी और बलरामपुर में संचालित प्रौद्योगिकी ग्राम केंद्रों की गतिविधियां भी प्रदर्शित की गई हैं। इन केंद्रों पर किसानों और ग्रामीणों को उन्नत कृषि तकनीक, ड्रोन, रोबोटिक्स, जैविक खाद निर्माण और मोबाइल बैंकिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं नवा रायपुर में प्रस्तावित साइंस सिटी की रूपरेखा में जलवायु परिवर्तन, खनिज, अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक तकनीक से जुड़ी चार प्रमुख दीर्घाएं शामिल होंगी।

प्रदर्शनी में एआई के जरिए डीपफेक, वॉइस क्लोनिंग और साइबर फ्रॉड के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली गैलरी की जानकारी भी दी गई है। ड्रोन आधारित सर्वेक्षण तकनीक के माध्यम से जमीन, सड़क, भवन और अन्य निर्माणों का नक्शा तैयार करने के साथ अवैध निर्माण की पहचान तथा संपत्तियों के सत्यापन में सहायता मिल सकती है। भिलाई में इस तकनीक का सर्वेक्षण किया जा चुका है। इसके लिए आईआईटी भिलाई के साथ एमओयू के तहत विकसित ट्रिनिटी एफ-90 और अस्त्रअयम ड्रोन भी प्रदर्शित किए गए हैं।