बिलासपुर । छत्तीसगढ़ में मानसिक रूप से अस्वस्थ और विशेष देखभाल की जरूरत वाले लोगों के लिए संचालित घरौंदा केंद्रों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बिलासपुर के एक केंद्र में दिव्यांग व्यक्ति को पलंग से बांधकर रखने का मामला सामने आया है। वहीं, रायपुर के घरौंदा केंद्र में एक बच्चे समेत चार महिलाओं की मौत का खुलासा हुआ है। कोर्ट कमिश्नरों की निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आई इन स्थितियों पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
बच्चों की मौत और लापता होने का मामला पहले से विचाराधीन
दरअसल, रायपुर के घरौंदा केंद्र में आठ बच्चों की मौत और पांच बच्चों के लापता होने का मामला पहले ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के संज्ञान में आ चुका है। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने इन घटनाओं को अमानवीय बताते हुए सभी कोर्ट कमिश्नरों को जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।
11 कोर्ट कमिश्नरों ने किया केंद्रों का निरीक्षण
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने 11 कोर्ट कमिश्नरों की नियुक्ति की थी। इनमें एडवोकेट विवेक श्रीवास्तव, अपूर्व त्रिपाठी, संघर्ष पाण्डेय, शिवाली दुबे और ईश्वर जायसवाल सहित अन्य शामिल हैं। कमिश्नरों ने शासन और केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत संचालित घरौंदा केंद्रों का निरीक्षण कर वहां की वास्तविक स्थिति से संबंधित रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की है।
तीन साल में 9 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा
इससे पहले वित्त विभाग और समाज कल्याण विभाग के सचिवों के साथ मुख्य सचिव ने भी हाईकोर्ट में शपथपत्र दाखिल किया था। इसमें बताया गया था कि पिछले तीन वर्षों में सरकार ने इन केंद्रों में रहने वाले बच्चों पर करीब 9 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। हालांकि, निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आई स्थितियों ने सरकारी व्यवस्था और देखरेख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोपलवाणी की जनहित याचिका पर सुनवाई
इस पूरे मामले की शुरुआत रायपुर की संस्था कोपलवाणी की ओर से दायर जनहित याचिका से हुई। याचिका में वर्ष 2014 से संचालित घरौंदा केंद्र में बच्चों की देखरेख और कथित भूखमरी से मौत के मामलों को उठाया गया था। संस्था ने पहले भी राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी।अब कोर्ट कमिश्नरों की रिपोर्ट के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई में सरकार के जवाब और केंद्रों की व्यवस्था सुधारने के लिए उठाए गए कदमों पर सबकी नजर रहेगी।
