भोपाल। किसान का कर्ज माफ करने की अनुशंसा के बावजूद उसकी तीन एकड़ जमीन महज 40 हजार रुपये में नीलाम करने के मामले में लोकायुक्त की विशेष अदालत ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के तत्कालीन महाप्रबंधक और प्रबंधक सहित पांच आरोपितों को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी आरोपितों पर जुर्माना भी लगाया है।
विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह की अदालत ने तत्कालीन महाप्रबंधक अशोक मुखरैया, प्रबंधक विनोद कुमार देवल, विक्रय अधिकारी हरिहर प्रसाद मिश्रा, सहकारिता निरीक्षक एपीएस कुशवाहा और नीलामी में जमीन खरीदने वाले परमजीत सिंह बेदी को दोषी ठहराया।
लोकायुक्त की विशेष लोक अभियोजक हेमलता कुशवाहा के अनुसार मामला विदिशा रोड स्थित ग्राम रासला खेड़ी के किसान विजय नारायण से जुड़ा है। किसान ने वर्ष 1984 में दूध डेयरी उद्योग शुरू करने के लिए अपनी करीब तीन एकड़ जमीन बैंक में चार हजार रुपये में गिरवी रखी थी। बैंक की आधिकारिक नोटशीट में कर्ज की राशि कम होने के आधार पर किसान का ऋण माफ करने की अनुशंसा दर्ज थी। इसके बावजूद तत्कालीन बैंक अधिकारियों ने जमीन की नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
आरोप के अनुसार वर्ष 2002 में नीलामी की प्रक्रिया में अनियमितता बरतते हुए किसान की तीन एकड़ जमीन तत्कालीन कलेक्टर गाइडलाइन दर से भी कम कीमत पर महज 40 हजार रुपये में परमजीत सिंह बेदी के नाम नीलाम कर दी गई। इस प्रक्रिया में बैंक अधिकारियों और खरीदार की मिलीभगत सामने आई थी।
शिकायत मिलने पर लोकायुक्त पुलिस ने जांच कर तत्कालीन अधिकारियों और जमीन खरीदने वाले के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और कूटरचना सहित संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था। सुनवाई के दौरान लोकायुक्त की ओर से पेश दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पांचों आरोपितों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
