नवा रायपुर में जनजातीय वीरों की गाथाओं को मिली नई पहचान, डिजिटल संग्रहालय में दिखेगा छत्तीसगढ़ के बलिदानियों का इतिहास

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से नवा रायपुर में स्थापित शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय खास पहचान बना रहा है। आधुनिक डिजिटल तकनीक, वीएफएक्स और जीवंत मूर्तिशिल्पों के जरिए यहां जनजातीय नायकों की शौर्यगाथाओं को इस तरह प्रस्तुत किया गया है कि आगंतुक इतिहास को करीब से महसूस कर सकें। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और जनजातीय कल्याण मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में तैयार यह संग्रहालय जनजातीय स्वाभिमान और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण की महत्वपूर्ण पहल है।

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर 1 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संग्रहालय को राष्ट्र को समर्पित किया था। करीब 50 से 55 करोड़ रुपये की लागत से बने इस परिसर में 650 से अधिक मूर्तिशिल्पों के माध्यम से जनजातीय समाज के संघर्षों और स्वतंत्रता आंदोलनों का चित्रण किया गया है। हल्बा, सरगुजा, परलकोट, तारापुर, लिंगागिरी, मुरिया, भूमकाल और सोनाखान जैसे विद्रोहों के साथ झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह की घटनाओं को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है।

संग्रहालय में वीर नारायण सिंह सहित उन जनजातीय सेनानियों के योगदान को दर्शाया गया है, जिन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। वीएफएक्स, डिजिटल प्रोजेक्शन और दृश्य-श्रव्य प्रस्तुतियों के माध्यम से ऐतिहासिक घटनाओं को जीवंत रूप दिया गया है। वहीं, डिजिटल बोर्ड और क्यूआर कोड की मदद से दर्शक अपने मोबाइल पर भी विभिन्न घटनाओं और स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

आगंतुकों की सुविधा के लिए परिसर में पेयजल, पार्किंग, सीसीटीवी सुरक्षा, प्राथमिक उपचार, व्हीलचेयर और शिशु देखभाल कक्ष जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सामान्य दिनों में यहां एक से दो हजार और छुट्टियों के दौरान चार से पांच हजार तक लोग पहुंच रहे हैं। संग्रहालय के शुभारंभ से अब तक तीन लाख से अधिक लोग इसका भ्रमण कर चुके हैं। विद्यार्थियों, शोधार्थियों, पर्यटकों और देश-विदेश से आने वाले आगंतुकों के लिए यह इतिहास और संस्कृति को समझने का महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है।

यह संग्रहालय केवल ऐतिहासिक घटनाओं का प्रदर्शन नहीं करता, बल्कि उन जनजातीय नायकों को सम्मान भी देता है, जिनका योगदान लंबे समय तक इतिहास के प्रमुख पन्नों में अपेक्षित स्थान नहीं पा सका। इसके साथ ही नवा रायपुर में सांस्कृतिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार की संभावनाओं को भी बढ़ावा मिल रहा है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से संरक्षित यह विरासत आने वाली पीढ़ियों को जनजातीय समाज के संघर्ष, साहस और स्वाभिमान से परिचित कराने का माध्यम बन रही है।