अभी नहीं तो कभी नहीं, सब आ जाओ एक साथ; अभिजीत दीपके ने भरी हुंकार

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मुंबई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे और महा विकास आघाड़ी (एमवीए) के वरिष्ठ नेताओं ने मुंबई में विशाल ‘विराट गर्जना मोर्चा’ निकाला। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सवाल उठाए तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।

तिरंगा और संविधान लेकर निकले प्रदर्शनकारी
मोर्चे की शुरुआत मेट्रो सिनेमा से हुई और यह सीएसएमटी के पास बीएमसी मुख्यालय के बाहर जनसभा में तब्दील हो गया। खास बात यह रही कि प्रदर्शनकारियों ने किसी राजनीतिक दल का झंडा नहीं उठाया। बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा और संविधान की प्रतियां लेकर मार्च में शामिल हुए। आयोजकों ने इसे लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा से जुड़ा जनआंदोलन बताया।

एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना
प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि एसआईआर के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं और इससे उनके मताधिकार पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, ये आरोप विपक्षी दलों के हैं और चुनाव आयोग चुनावी प्रक्रिया को निर्धारित कानूनी एवं संवैधानिक प्रावधानों के तहत संचालित करने की बात कहता रहा है।

‘वोट चोरी’ के आरोप को बनाया मुद्दा
मोर्चे को संबोधित करते हुए एमवीए नेताओं ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट तथा एनसीपी (एसपी) नेताओं अनिल देशमुख और शशिकांत शिंदे समेत कई नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाए। नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा जरूरी है।

अभिजीत दीपके बोले- ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’
इस विरोध प्रदर्शन पर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के प्रदर्शन का वीडियो साझा करते हुए कहा कि मुंबई एक बार फिर निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव की मांग को लेकर सड़कों पर है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता जताते हुए कहा कि सभी भारतीयों को एक साथ आने की जरूरत है। उन्होंने महाराष्ट्र और दिल्ली पुलिस के प्रदर्शन प्रबंधन के तरीके में अंतर का भी उल्लेख किया।

राजनीतिक एकजुटता दिखाने की कोशिश
उद्धव और राज ठाकरे का एक मंच पर आना इस प्रदर्शन की प्रमुख राजनीतिक घटनाओं में रहा। एमवीए के नेताओं की मौजूदगी ने भी विपक्षी दलों के बीच चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर व्यापक एकजुटता दिखाने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों ने लोकतंत्र, संविधान और मताधिकार की रक्षा को आंदोलन का मुख्य मुद्दा बताया।