छत्तीसगढ़ में योजनाओं का असर, आवास से आजीविका तक लोगों के जीवन में बदलाव

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रायपुर। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा माना जाता है, जब उनका फायदा सीधे लोगों की जिंदगी में दिखाई दे। छत्तीसगढ़ में सेवा संकल्प अभियान के दौरान सामने आए उदाहरणों में पक्के मकान से मिली सुरक्षा, महिलाओं को मिला आर्थिक सहारा, किसानों के लिए सिंचाई की सुविधा, बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार और पशुपालकों की बढ़ती आय जैसे बदलाव सामने आए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शासन की योजनाओं और नागरिक सेवाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल में विकास को केवल निर्माण कार्यों तक सीमित न रखकर गांव, गरीब, महिला, किसान, बच्चे और दूरस्थ इलाकों के परिवारों को सुविधाओं से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

सरगुजा में पीएम जनमन के जरिए पहाड़ी कोरवा परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराए गए। मोहन राम और मोटू राम जैसे परिवारों के लिए यह सुविधा कच्चे मकान की परेशानियों से राहत का जरिया बनी। उदयपुर क्षेत्र में हुडकू राम, बिरझु, रतन साय और छन्दू जैसे परिवारों के गृह प्रवेश ने भी इस बदलाव को सामने रखा। दूसरी ओर, सेवा सेतु और सीएम हेल्पलाइन 1076 जैसी व्यवस्थाओं से सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान करने का प्रयास किया जा रहा है। अम्बिकापुर की डाली गंधर के आधार कार्ड में नाम की गलती दूर होने के बाद बैंक खाता और छात्रवृत्ति से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ सकी। सरगुजा की छात्रा आराधना सिंह के आधार कार्ड में जन्मतिथि संबंधी समस्या के समाधान से उनकी उच्च शिक्षा की प्रक्रिया भी सुगम हुई।

महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने में महतारी वंदन योजना और बिहान के स्व-सहायता समूहों की भूमिका बताई गई है। सरगुजा की राखी पति के निधन के बाद खेती और सिलाई से परिवार चला रही हैं तथा योजना से मिलने वाली सहायता का इस्तेमाल बच्चों के पोषण और सिलाई सामग्री के लिए करती हैं। अम्बिकापुर की कल्पना सिंह ने स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर खीरे की खेती शुरू की और बाद में अन्य फसलों का उत्पादन भी बढ़ाया। उदयपुर की मति बाई ने समूह से जुड़ने के बाद मुर्गी पालन को व्यवसाय बनाया। सरगुजा में छेरी बैंक जैसे प्रयास भी महिलाओं को पशुपालन आधारित आय से जोड़ रहे हैं। इसी तरह अम्बिकापुर के पोषण पुनर्वास केंद्र में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के इलाज और पोषण सुधार पर काम किया जा रहा है। शिवाशी, रश्मि, प्रतीक और युवराज के वजन में उपचार के दौरान हुई वृद्धि को बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में प्रगति के रूप में बताया गया है।

ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन और कृषि से जुड़ी तकनीक तथा योजनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। सीतापुर विकासखंड के दयासागर ने विभागीय मार्गदर्शन से कृत्रिम गर्भाधान और नस्ल सुधार अपनाया, जिससे उनके पशुओं के दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी हुई। लुण्ड्रा के जयनाथ राम ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन के सहयोग से बकरी पालन को अपनी आजीविका से जोड़ा। वहीं सौर सुजला योजना के तहत सौर सिंचाई पंप मिलने से किसानों के लिए खेती का दायरा बढ़ाने के अवसर बने हैं। लबेद सिंह जैसे किसान धान के अलावा दलहन, तिलहन, सब्जियां, फलदार पौधे और फूलों की खेती कर रहे हैं तथा मछली पालन को भी आय के अतिरिक्त साधन के रूप में अपना रहे हैं। मृदा परीक्षण, जल संरक्षण और डबरी आधारित गतिविधियां खेती को अधिक विविध और लाभकारी बनाने की दिशा में उपयोगी बताई गई हैं।

इन सभी उदाहरणों में योजनाएं अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी हैं, लेकिन लक्ष्य एक ही है—लोगों के जीवन को बेहतर बनाना। किसी परिवार के लिए पक्का मकान सुरक्षा देता है, किसी महिला के लिए आर्थिक सहायता निर्णय लेने का आत्मविश्वास बढ़ाती है, किसी बच्चे के लिए बेहतर पोषण स्वस्थ भविष्य की नींव रखता है और किसान-पशुपालक के लिए तकनीकी सहायता आय के नए रास्ते खोलती है। सेवा संकल्प अभियान से सामने आई ये कहानियां बताती हैं कि सुशासन का वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देता है, जब सरकारी सेवा समय पर मिले, प्रक्रिया सरल हो और जरूरतमंद व्यक्ति को आगे बढ़ने का अवसर मिले। यही जनसेवा को जनकल्याण में बदलने की दिशा है।