रबी फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी को मंजूरी, कुसुम का समर्थन मूल्य 675 रुपये बढ़ा

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गेहूं का एमएसपी 25 रुपये बढ़कर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों में 413 और मसूर में 390 रुपये की वृद्धि

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने विपणन सीजन 2027-28 के लिए सभी अधिदेशित रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। सरकार के अनुसार, इस निर्णय का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना है।

सरकार ने रबी सीजन की छह प्रमुख फसलों के एमएसपी में वृद्धि की है। कुसुम के एमएसपी में सबसे अधिक 675 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद रेपसीड एवं सरसों में 413 रुपये, मसूर में 390 रुपये, जौ में 136 रुपये, चना में 83 रुपये और गेहूं में 25 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।

2027-28 में रबी फसलों का नया एमएसपी

फसल एमएसपी 2027-28 (रु./क्विंटल) 2026-27 के मुकाबले वृद्धि

  • गेहूं 2,610 25 रुपये
  • जौ 2,286 136 रुपये
  • चना 5,958 83 रुपये
  • मसूर 7,390 390 रुपये
  • रेपसीड एवं सरसों 6,613 413 रुपये
  • कुसुम 7,215 675 रुपये

सरकार ने बताया कि एमएसपी में यह वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 में की गई उस घोषणा के अनुरूप है, जिसके तहत एमएसपी को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर निर्धारित करने का प्रावधान किया गया था। उत्पादन लागत की तुलना में अपेक्षित मार्जिन गेहूं के लिए 106 प्रतिशत है। इसके बाद रेपसीड एवं सरसों के लिए 96 प्रतिशत, मसूर के लिए 92 प्रतिशत, चना के लिए 59 प्रतिशत, जौ के लिए 58 प्रतिशत और कुसुम के लिए 50 प्रतिशत मार्जिन निर्धारित किया गया है।

दलहन और तिलहन को बढ़ावा देने पर जोर
सरकार के अनुसार, हाल के वर्षों में अनाज के अलावा दलहन और तिलहन जैसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए इनके लिए अपेक्षाकृत अधिक एमएसपी की पेशकश की जा रही है। सरकार का कहना है कि रबी फसलों के बढ़े हुए एमएसपी से किसानों को लाभकारी मूल्य मिलने के साथ फसल विविधीकरण को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

उत्पादन लागत में किराए पर लिए गए मानव श्रम, बैल एवं मशीन श्रम, पट्टे पर ली गई भूमि का किराया, बीज, उर्वरक और खाद, सिंचाई शुल्क, कृषि उपकरणों एवं भवनों पर मूल्यह्रास, कार्यशील पूंजी पर ब्याज, डीजल एवं बिजली सहित विभिन्न खर्च तथा पारिवारिक श्रम का अनुमानित मूल्य शामिल किया जाता है।

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गेहूं की खरीद और किसानों को भुगतान में वृद्धि
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान गेहूं की खरीद 3,715 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2,254 लाख मीट्रिक टन थी। इसी अवधि में रबी की छह फसलों की खरीद 3,921 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई, जो 2004-05 से 2013-14 के दौरान 2,302 लाख मीट्रिक टन थी।

वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान गेहूं उत्पादक किसानों को एमएसपी के रूप में 7.31 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह राशि 2.56 लाख करोड़ रुपये थी। इसी तरह, 2014-15 से 2025-26 के दौरान रबी की छह फसलों के उत्पादक किसानों को एमएसपी के रूप में 8.36 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह राशि 2.65 लाख करोड़ रुपये थी।