मई 2025 के सैन्य टकराव में ट्रंप के हस्तक्षेप का किया जिक्र, भारत ने सीमा-पार आतंकवाद पर पाकिस्तान को घेरा
न्यूयॉर्क। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में शुक्रवार को अपने संबोधन के दौरान मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय उनके हस्तक्षेप से दोनों परमाणु-संपन्न देशों के बीच तनाव को और बढऩे से रोकने में मदद मिली। शरीफ ने कहा कि चार दिनों तक चले सैन्य टकराव के दौरान स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी और दोनों देश व्यापक संघर्ष की ओर बढ़ रहे थे।
शरीफ ने कहा कि दक्षिण एशिया को दोबारा ऐसी स्थिति में नहीं पहुंचना चाहिए, जहां सैन्य तनाव बड़े युद्ध का रूप ले ले। उन्होंने मई 2025 के संघर्ष का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई को आत्मरक्षा के अधिकार के तहत उठाया गया कदम बताया और पाकिस्तानी सेना के प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर के नेतृत्व की सराहना की।
शरीफ ने अपने संबोधन में मई 2025 के सैन्य टकराव को भारत की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ की गई कार्रवाई के रूप में पेश किया। पाकिस्तान का दावा है कि उसने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल किया था। दूसरी ओर, भारत मई 2025 की कार्रवाई को पहलगाम आतंकी हमले के बाद की कार्रवाई के रूप में बताता रहा है।
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22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। भारत के अनुसार, इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव हुआ।
संघर्षविराम को लेकर भारत और पाकिस्तान के रुख में भी अंतर रहा है। भारत लगातार कहता रहा है कि सैन्य कार्रवाई रोकने पर दोनों देशों के बीच सीधे संपर्क के माध्यम से सहमति बनी थी और इसमें किसी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं थी। वहीं, शरीफ ने अपने संयुक्त राष्ट्र संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में सिंधु जल संधि का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। शरीफ ने भारत द्वारा संधि को रोकने के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, उसके प्रवाह में बाधा डालने या उसका रुख बदलने के किसी भी प्रयास को इस्लामाबाद युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखेगा।
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उन्होंने कहा कि नदियां देशों के बीच सहयोग और समृद्धि का माध्यम होनी चाहिए, न कि विवाद और टकराव का कारण। शरीफ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई हालिया कार्यवाहियों और विशेषज्ञों की राय का हवाला देते हुए दावा किया कि सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान के रुख को समर्थन मिला है। शहबाज शरीफ के संबोधन के बाद भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के आरोपों का जवाब दिया गया। संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पाकिस्तान पर सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि भारत को आतंकवाद के खिलाफ अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है और सीमा-पार आतंकवाद के लिए पाकिस्तान को परिणाम भुगतने होंगे।भारत ने पाकिस्तान के उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें मई 2025 के संघर्ष को लेकर इस्लामाबाद ने अपनी सैन्य कार्रवाई को सफलता के रूप में पेश किया। संयुक्त राष्ट्र में दोनों देशों के बयानों से एक बार फिर कश्मीर, आतंकवाद, मई 2025 के सैन्य टकराव और सिंधु जल संधि जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा के केंद्र में आ गए।

