बिहार: राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग शुरू, मैथिली ठाकुर ने भी किया मतदान

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बिहार। ओडिशा और हरियाणा की 11 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान शुरू हो गया। नतीजे आज ही घोषित किए जाएंगे। इस बार कुल 37 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, जिसमें से 26 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा चुके हैं। राजनीतिक जानकार इसे केंद्र में सत्ता संतुलन और राज्यों की सियासी ताकत का अहम संकेत मान रहे हैं। आपको बता दें की ओडिशा की चार सीटों पर भाजपा दो सीटें निर्विरोध जीत सकती है और बीजेडी एक सीट। ऐसे में मुकाबला चौथे सीट को लेकर तेज हो गया है। इस बात को ऐसे समझ सकते हैं कि ओडिशा विधानसभा में कुल 147 सदस्य हैं। इनमें भाजपा के 79 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। वहीं, 15 जनवरी को अपने दो विधायकों के निलंबन के बाद बीजद के 48 सदस्य बचे हैं। कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं और एक सदस्य सीपीआई (एम) का है। चुनाव का समीकरण दिलचस्प हो गया है क्योंकि न तो सत्ताधारी भाजपा और न ही मुख्य विपक्षी बीजद के पास चौथी सीट जीतने के लिए पर्याप्त विधायक संख्या है। ऐसे में क्रॉस-वोटिंग की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। वहीं राज्यसभा चुनाव के गणित के अनुसार, एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 30 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होती है। भाजपा के पास 82 सदस्यों का समर्थन होने के कारण, अपने दो उम्मीदवारों को जिताने के बाद उसके पास 22 अतिरिक्त वोट बचेंगे। इसी तरह, बीजद के एक उम्मीदवार के जीतने के बाद 18 अतिरिक्त वोट होंगे।

इस बार के राज्यसभा चुनाव में भाजपा की ओर से दो उम्मीदवार मैदान में हैं। राज्य इकाई के अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार। इसके अतिरिक्त, पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं, जिन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है। वहीं, बीजद ने अपने दो प्रमुख नेताओं संतृप्त मिश्रा और प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर होटा को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने बीजद के उम्मीदवारों का समर्थन किया है। बिहार में पांच सीटों में चार पर भाजपा की दावेदारी, एक कहां फंस रही? बात अब बिहार की पांच राज्यसभा सीटों की करें तो इसमें से साफ-साफ एनडीए चार सीटें आसानी से जीतने को तैयार है। हालांकि दूसरी ओर रोचक बात यह है कि पांचवीं सीट के लिए AIMIM की मदद पर निर्भरता है। वहीं आरजेडी और गठबंधन को इसमें जीत के लिए अतिरिक्त समर्थन चाहिए। पश्चिम बंगाल का क्या है हाल? पश्चिम बंगाल की पांच राज्यसभा सीटों पर पर हो रहे चुनाव में टीएमसी 223 विधायकों के साथ चार सीटें जीत सकती है, जबकि भाजपा केवल एक सीट जीत पाएगी। कांग्रेस और CPI(M) अब किसी भी सीट पर दावा नहीं कर पाएंगे। तमिलनाडु के छह राज्यसभा सीटों में डीएमके गठबंधन चार सीटें, AIADMK-एनडीए गठबंधन 2 सीटें निर्विरोध जीतने के लिए तैयार है। सभी सीटों पर कोई बदलाव नहीं होगा।

बता दें कि महाराष्ट्र की सात सीटों पर हो रहे राज्यसभा चुनाव के समीकरण को ऐसे समझ सकते हैं कि महाराष्ट्र में एनडीए 235 विधायकों के साथ सात में छह सीटें जीतने के करीब है। ऐसे में विपक्षी एमवीए सिर्फ एक सीट जीत पाएगा। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि एनडीए ने अधिकतर नई चेहरों को उम्मीदवार बनाया है, जबकि एमवीए ने सिर्फ शरद पवार को मैदान में उतारा है।राज्यसभा के सदस्य राज्य विधानसभा के सदस्यों द्वारा एकल स्थानांतरित वोट प्रणाली के तहत चुने जाते हैं। हर उम्मीदवार को जीतने के लिए एक निर्धारित कोटा के मत चाहिए। कोटा की गणना के लिए मतदान करने वाले कुल विधायकों की संख्या को खाली सीटों की संख्या प्लस एक से विभाजित किया जाता है और परिणाम में एक जोड़कर कोटा तय किया जाता है। यदि किसी उम्मीदवार को पहला पसंद वोट नहीं मिलते, तो दूसरे और तीसरे पसंद के वोटों को लिया जाता है। 37 सीटों के लिए होने वाले राज्यसभा चुनावों में देश की राजनीति के समीकरण पर ध्यान है। 16 मार्च को मतदान होने से पहले ही कुछ सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा चुके हैं। वर्तमान स्थिति के मुताबिक, भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को साफ बढ़त मिल रही है, जबकि विपक्षी इंडिया ब्लॉक की ताकत घटने की आशंका है। एनडीए 245 सदस्यीय राज्यसभा में 133 सांसदों के साथ 122 की बहुमत सीमा पार कर चुका है, जबकि भाजपा अकेले 103 सांसदों के साथ बहुमत से 20 सीटें कम है। विपक्षी ब्लॉक के पास कुल 79 सांसद हैं, जिनमें कांग्रेस के 27, टीएमसी के 12, डीएमके के 10 और आरजेडी के 5 सांसद शामिल हैं।

राज्यसभा चुनाव की सियासी लड़ाई सोमवार को पूरी रफ्तार के साथ शुरू हो गई है। इसके लिए 11 सीटों के लिए मतदान शुरू हो गई है, जिनमें बिहार की पांच, ओडिशा की चार और हरियाणा की दो सीटें शामिल हैं। इस चुनाव में देश की राजनीति के हालात पर नजरें टिकी हैं, क्योंकि राज्यसभा में बहुमत के समीकरण सीधे केंद्र की नीतियों और विधायी शक्ति पर असर डालते हैं। इस बार कुल 37 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, लेकिन इनमें से 26 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण पहले ही स्पष्ट हो चुके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आज का मतदान न केवल इन राज्यों की सियासी ताकत दिखाएगा बल्कि केंद्र में सत्ता संतुलन के लिहाज से भी अहम साबित होगा।