नई दिल्ली। हरछठ यानी हलषष्ठी व्रत संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और संकटों से रक्षा की कामना के लिए रखा जाता है। यह व्रत 2 सितंबर को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर मनाया जाएगा। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम का जन्म हुआ था, इसलिए इस पर्व पर हल और कृषि से जुड़ी परंपराओं का विशेष महत्व माना जाता है।
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इन चीजों का सेवन भूलकर भी न करें:
हरछठ व्रत में हल से जोती गई जमीन पर उगे अनाज, सब्जियां और कंद-मूल का सेवन वर्जित माना जाता है। इस दिन गेहूं, चावल, दाल और तामसिक भोजन से परहेज किया जाता है। साथ ही गाय के दूध, दही और घी से बनी चीजें भी नहीं खाई जातीं।
व्रत में क्या खा सकते हैं?:
इस व्रत में भैंस के दूध से बनी चीजें, सिंघाड़ा, महुआ और पानी में उगने वाला पसही (तीना चावल) ग्रहण करने की परंपरा है। अलग-अलग क्षेत्रों में खान-पान की परंपराओं में थोड़ा अंतर भी देखने को मिलता है।
इन नियमों का रखें ध्यान:
व्रत के दिन बाल और नाखून काटने, पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाने और सुई-धागे का काम करने से बचने की मान्यता है। झूठ बोलने, अपशब्द कहने और जरूरतमंद को खाली हाथ लौटाने से भी परहेज करना चाहिए।
ऐसे करें व्रत का पारण:
शाम को पूजा और व्रत कथा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। कई स्थानों पर दही-चावल से पारण करने की परंपरा है। पूजा के दौरान महिलाएं संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं। कई क्षेत्रों में प्रत्येक संतान के लिए छह छोटे मिट्टी के बर्तनों में भुने हुए अनाज या मेवे अर्पित करने की परंपरा भी निभाई जाती है।
