एससीओ ने बिश्केक घोषणा-पत्र अपनाया, भारत समर्थित चार पहलों को शामिल किया

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नयी दिल्ली। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के बिश्केक शिखर सम्मेलन में मंगलवार को बिश्केक घोषणा-पत्र के साथ-साथ चार समझौता ज्ञापनों और 20 से अधिक निर्णयों तथा वक्तव्यों को अपनाया गया जिनमें जलवायु, परमाणु सुरक्षा, ऊर्जा संरक्षण और नशीली दवाओं की लत से निपटने सहित कई क्षेत्र शामिल हैं। भारत द्वारा शुरू की गई या समर्थित कई पहलों को भी बिश्केक घोषणा-पत्र में शामिल किया गया, जिनमें एससीओ चार्टर में अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल करना, सभ्यता संवाद मंच, युवा वैज्ञानिक मंच और युवा लेखक सम्मेलन शामिल हैं।

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 26 वां एससीओ शिखर सम्मेलन सोमवार को शुरू हुआ था और आज संपन्न हो गया। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने सदस्य देशों के प्रमुखों के साथ घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किये। एससीओ की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित शिखर सम्मेलन में नेताओं ने संगठन की प्रगति का जायजा लिया और क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने में एससीओ की भूमिका को मजबूत करने के तरीकों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

बाद में बिश्केक घोषणा पत्र को अपनाया गया जिसमें मुख्य रूप से आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करने, क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने, और संपर्क तथा आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है। भारत इस वर्ष के अंत में एससीओ सभ्यता संवाद मंच के पहले आयोजन की मेजबानी करेगा।प्रधानमंत्री मोदी ने इसे एससीओ के सदस्य देशों के बीच सभ्यतागत आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए भारत की प्रमुख पहल बताया।

मोदी ने एससीओ के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की बैठक में अपने संबोधन में कहा कि संगठन की 25वीं वर्षगांठ अगले 25 वर्षों के लिए एक रोडमैप तैयार करने का अवसर प्रदान करती है, जो संवाद और सहयोग की उसकी परंपरा पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भारत ने पहले सुरक्षा, संपर्क और अवसर के अपने दृष्टिकोण को साझा किया था और अब इन तीन स्तंभों के क्षेत्र में ठोस परिणामों की जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने भारत के इस रुख को दोहराया कि संघर्षों का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं किया जा सकता और संवाद तथा कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है। आतंकवाद को मानवता के लिए गंभीर खतरा बताते हुए उन्होंने आतंकवाद के तंत्र को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध कार्रवाई का आह्वान किया और जोर देकर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए।

अफगानिस्तान पर मोदी ने कहा कि यूरेशिया इसकी सुरक्षा देश में शांति और स्थिरता से निकटता से जुड़ी हुई है और उन्होंने अफगानिस्तान के लिए भारत की विकास एवं मानवीय सहायता का उल्लेख किया। मोदी ने कहा कि मजबूत और विश्वसनीय संपर्क पहल साझा प्रगति और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि भारत उन संपर्क प्रयासों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ते हैं, व्यापार को बढ़ाते हैं और विकास के लिए नए अवसर खोलते हैं।
उन्होंने जोर दिया कि ऐसे प्रयासों में देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।

प्रौद्योगिकी, उद्यमिता, नवाचार, स्टार्ट-अप और लोगों के बीच संपर्क की पहलों को रेखांकित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि ये क्षेत्र एससीओ देशों के लोगों के लिए अपार अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने किर्गिस्तान की अध्यक्षता के तहत युवाओं की भागीदारी पर दिए गए जोर की सराहना की और कहा कि भारत इस वर्ष के अंत में एससीओ सभ्यता संवाद मंच के पहले आयोजन की मेजबानी करेगा।

प्रधानमंत्री ने शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर झापारोव को धन्यवाद दिया और साझा प्रगति तथा समृद्धि के लिए एससीओ परिवार के साथ काम करने की भारत की प्रतिबद्धता व्यक्त की।