काठमांडू,/ तिब्बत की सीमा के निकट मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई और करीब 100 लोगों की मौत हो गई, वहीं 133 भारतीय नागरिक समेत 750 से अधिक लोग लापता हो गए। बाढ़ से शहरों और गांवों में तबाही हुई, कई पुल बह गए और कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत इलाके में भूकंप आया और उसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की खबर मिली, जिससे पता चलता है कि भूकंप के झटकों की वजह से हिमनद फटा होगा और उसी से बाढ़ आई होगी। अधिकारियों ने बताया कि भोटे कोशी नदी में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा, जिससे तिब्बत से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए।
पानी-मलबे में बह गया मजदूर, आम के पेड़ ने बचाई जान
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के दौरान एक नेपाली मजदूर की जान आम के पेड़ की वजह से बच गई। बिदुर में काम कर रहे बिबेक कुमाल शौचालय के लिए गड्ढा खोद रहे थे, तभी पानी, मिट्टी और पत्थरों की तेज लहर अचानक आ गई। उनके साथ काम कर रहे चार मजदूरों ने उन्हें भागने के लिए कहा। कुमाल गड्ढे से निकलकर भागे, लेकिन तेज बहाव उन्हें अपने साथ बहा ले गया। इसी दौरान वह एक आम के पेड़ में फंस गए। काठमांडू के अस्पताल में भर्ती कुमाल ने कहा कि अगर आम का पेड़ नहीं होता तो वह बहकर मर जाते।
