प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को आईना दिखा रहे स्कूली बच्चे, सरकार तलाश रही है बहाने – अरुण वोरा

Follow Us

दुर्ग। दुर्ग शहर के पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरुण वोरा ने प्रदेश की स्कूल शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से शिक्षकों की कमी सहित स्कूलों की मूलभूत समस्याओं के शीघ्र निराकरण की मांग की है।समीक्षा बैठक में सामने आए विषयों पर प्रतिक्रिया देते हुए वोरा ने कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में आरोप-प्रत्यारोप के बजाय व्यवस्थागत कमियों को दूर करने पर प्राथमिकता से काम होना चाहिए।

वोरा ने दुर्ग जिले में शिक्षकों की मांग को लेकर बच्चों के सड़क पर उतरने की घटना को बेहद गंभीर बताया।उन्होंने कहा, “400 बच्चे आधी रात तक सड़क पर बैठे हों और उनकी मांग सिर्फ इतनी हो कि उन्हें पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक मिल जाएं, तो इससे बड़ी चेतावनी शिक्षा व्यवस्था के लिए क्या होगी?”सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक, आवश्यक संसाधन और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो। शिक्षक सीमित संसाधनों में भी बच्चों को पढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, इसलिए उनकी समस्याओं और कठिनाइयों को भी गंभीरता से समझने की आवश्यकता है। समाधान प्रशासनिक संवेदनशीलता और पारदर्शी निर्णयों से ही संभव है।”

छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग की आज आयोजित समीक्षा बैठक में स्कूली शिक्षा मंत्री की मौजूदगी में स्कूलों में मीडिया एवं यूट्यूब पत्रकारों की एंट्री पर रोक तथा शिक्षकों की कमी की स्थिति में यूट्यूब के माध्यम से पढ़ाई कराने को लेकर कई बातें कही गईं।स्कूलों में मीडिया और यूट्यूब पत्रकारों के प्रवेश को लेकर वोरा ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सकारात्मक कार्यों के साथ-साथ जहां कमियां हैं, उन्हें भी सामने आना चाहिए। मीडिया लोकतंत्र का महत्वपूर्ण माध्यम है। स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने आने से सरकार और प्रशासन को कमियों को पहचानकर उनमें सुधार करने में मदद मिल सकती है.

डिजिटल माध्यमों से पढ़ाई कराने की बात पर वोरा ने कहा कि आधुनिक तकनीक का शिक्षा में उपयोग समय की जरूरत है, लेकिन डिजिटल कंटेंट को नियमित शिक्षक का विकल्प बताना व्यावहारिक नहीं है।तकनीक शिक्षा का उपयोगी माध्यम हो सकती है, लेकिन यह नियमित और पर्याप्त शिक्षकों का विकल्प नहीं बन सकती।उन्होंने कहा, “यूट्यूब वीडियो बच्चे को विषय समझा सकता है, लेकिन बच्चे की कॉपी देखकर उसकी गलती कौन सुधारेगा? उसकी झिझक कौन दूर करेगा? उसकी व्यक्तिगत कठिनाई कौन समझेगा? शिक्षक सिर्फ पाठ नहीं पढ़ाता, वह बच्चे को समझता भी है।”उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां इंटरनेट, बिजली और डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता अभी भी चुनौती है, वहां पहले बुनियादी सुविधाएं और शिक्षक सुनिश्चित किए जाने चाहिए।

वोरा ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।“शिक्षा किसी भी प्रदेश के भविष्य की नींव है। बच्चों की पढ़ाई किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। सरकार, शिक्षक, पालक और जनप्रतिनिधि मिलकर काम करें, तभी प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सकता है।”