वाशिंगटन । अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच होने वाले बड़े सैन्य अभ्यास से ठीक पहले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक ऐसा सोशल मीडिया पोस्ट कर दिया है, जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल तेज कर दी है। उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षणों और परमाणु युद्ध की धमकियों के बीच, ट्रंप ने तानाशाह किम जोंग उन के साथ अपनी ‘खास दोस्ती का दावा किया है। एक तरफ कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव अपने चरम पर है और मिसाइलें दागी जा रही हैं, तो दूसरी तरफ ट्रंप का यह बयान कूटनीतिक गलियारों में नई बहस का विषय बन गया है।
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डोनल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल पर उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन के साथ अपनी एक पुरानी तस्वीर साझा की है। इस तस्वीर के साथ ट्रंप ने लिखा है कि भले ही फोटो में वे दोनों बेहद गंभीर और गैर-दोस्ताना नजर आ रहे हों, लेकिन असल में उनके और किम जोंग उन के बीच रिश्ते बेहद मजबूत और बेहतरीन हैं। ट्रंप की यह कूटनीतिक टिप्पणी ऐसे नाजुक वक्त में आई है, जब इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और आक्रामक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।
ट्रंप का यह बयान अमेरिका और दक्षिण कोरिया के आगामी ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड सैन्य अभ्यास की शुरुआत से ठीक पहले आया है। यह वार्षिक युद्धाभ्यास 17 से 27 अगस्त के बीच आयोजित होना है। उत्तर कोरिया हमेशा से ही इन संयुक्त अभ्यासों को अपने खिलाफ सीधे युद्ध की तैयारी और उकसावे की कार्रवाई मानता रहा है। इसी कड़ी में उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के बीच बढ़ते त्रिपक्षीय रक्षा सहयोग पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उत्तर कोरियाई प्रवक्ता ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यह त्रिपक्षीय सहयोग अब पूरी तरह से एक ‘परमाणु गठबंधन का रूप ले रहा है और अगर उनकी सुरक्षा पर खतरा मंडराया, तो प्योंगयांग इसका और अधिक आक्रामक तरीके से मुकाबला करेगा।
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एक तरफ ट्रंप किम जोंग के साथ अपने निजी और मधुर संबंधों की दुहाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। दोनों देशों के बीच तनाव साफ नजर आ रहा है। उत्तर कोरिया ने अपने तेवर सख्त करते हुए 12 अगस्त को पूर्वी सागर (जापान सागर) की ओर एक संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है। महज एक हफ्ते के भीतर यह उनका दूसरा मिसाइल परीक्षण था। दक्षिण कोरियाई सेना और अमेरिकी प्रशासन ने भी इस मिसाइल लॉन्च की पुष्टि की है। ऐसे में अमेरिका के आक्रामक सैन्य अभ्यास और उत्तर कोरिया के लगातार मिसाइल परीक्षणों ने इस पूरे क्षेत्र को एक बार फिर से रणनीतिक तनाव और युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
