खराब गोला-बारूद से 62 करोड़ का नुकसान, धनुष तोप प्रोजेक्ट में देरी पर PAC ने रक्षा मंत्रालय को लगाई फटकार

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नई दिल्ली। संसद की पब्लिक अकाउंट्स कमिटी (PAC) ने रक्षा मंत्रालय के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। 18वीं लोकसभा की वर्ष 2026-27 की 49वीं रिपोर्ट में ऑर्डनेंस फैक्ट्री बड़माल से सेना को सप्लाई किए गए खराब गोला-बारूद के कारण हुए नुकसान और रक्षा परियोजनाओं में देरी का मुद्दा उठाया गया है। PAC के अनुसार, ऑर्डनेंस फैक्ट्री बड़माल द्वारा सप्लाई किए गए खराब गोला-बारूद को बदलने की वजह से सरकार को 62.10 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। समिति ने इसे केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि सेना की ऑपरेशनल तैयारियों और रक्षा आपूर्ति प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।

समिति ने रक्षा मंत्रालय को सप्लाई चेन व्यवस्था मजबूत करने, कड़े गुणवत्ता नियंत्रण मानक लागू करने और समय-समय पर निगरानी बढ़ाने की सिफारिश की है। PAC ने कहा कि भविष्य में ऐसी खामियों को रोकने के लिए उत्पादन और आपूर्ति प्रक्रिया में सख्त SOPs लागू किए जाने चाहिए। रिपोर्ट में आर्टिलरी गनों की खरीद प्रक्रिया में हुई देरी को भी सेना की क्षमता के लिए चिंता का विषय बताया गया है। PAC के मुताबिक, 1986 में बोफोर्स की 155mm/39 कैलिबर तोपों की खरीद और तकनीक हस्तांतरण के बाद नई आर्टिलरी प्रणाली की जरूरत महसूस की गई थी, लेकिन नई तोपों को सेना में शामिल करने में करीब दो दशक लग गए।

समिति ने कहा कि इस देरी के कारण सेना को लंबे समय तक पुरानी तोप प्रणालियों पर निर्भर रहना पड़ा। PAC ने भविष्य के सुरक्षा खतरों को ध्यान में रखते हुए हथियारों के स्टॉक की नियमित समीक्षा और समय पर खरीद प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत बताई है। स्वदेशी 155mm/45 कैलिबर धनुष तोप को PAC ने आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया, लेकिन इसके उत्पादन में हुई देरी पर चिंता जताई। समिति ने कहा कि उन्नत आर्टिलरी सिस्टम के निर्माण के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर और विशेषज्ञता विकसित करने में कमी के कारण परियोजना प्रभावित हुई।

PAC ने रक्षा परियोजनाओं की शुरुआत से पहले घरेलू क्षमता और तकनीकी संसाधनों का आकलन करने तथा घरेलू उद्योग को अधिक रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) सहयोग देने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में बैलिस्टिक्स, गन इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड साइटिंग सिस्टम जैसी विशेषज्ञताओं की कमी को भी देरी का कारण बताया गया है। समिति ने IITs और तकनीकी संस्थानों में रक्षा निर्माण से जुड़े विशेष पाठ्यक्रम शुरू करने और रक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों की नियमित ट्रेनिंग व अपस्किलिंग पर जोर दिया है। PAC ने बेहतर सप्लाई चेन मैनेजमेंट, सख्त समयसीमा और तेज निर्णय प्रक्रिया की जरूरत बताते हुए धनुष प्रोजेक्ट को मार्च 2027 तक पूरा करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की बात कही है।