सरगुजा। जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के चावल की कालाबाजारी के खिलाफ जिला प्रशासन और खाद्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। शासकीय उचित मूल्य दुकानों से मिलने वाले चावल की अवैध बिक्री की सूचना मिलने के बाद संयुक्त टीम ने अरुण ट्रेडर्स में छापेमार कार्रवाई की। इस दौरान मौके पर खड़े एक ट्रक से 130 बोरी पीडीएस चावल बरामद किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि सरकारी राशन दुकानों के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाने वाला पीडीएस चावल अवैध तरीके से बाजार में बेचा जा रहा है। शिकायतों की जांच के बाद जिला प्रशासन और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने अरुण ट्रेडर्स पर दबिश दी।
कार्रवाई के दौरान टीम जैसे ही मौके पर पहुंची, वहां मौजूद अरुण ट्रेडर्स का संचालक गोदाम में ताला लगाकर फरार हो गया। अधिकारियों ने बताया कि संचालक के इस व्यवहार से संदेह और गहरा गया है। प्रशासन को आशंका है कि गोदाम के अंदर भी बड़ी मात्रा में शासकीय पीडीएस चावल छिपाकर रखा गया हो सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अरुण ट्रेडर्स की दुकान और गोदाम दोनों को सील कर दिया है। अब अधिकारियों की मौजूदगी में गोदाम खोलकर वहां रखे खाद्यान्न का निरीक्षण किया जाएगा। जांच के दौरान चावल की मात्रा, उसके दस्तावेज और स्रोत की जानकारी जुटाई जाएगी।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि बरामद चावल सरकारी वितरण प्रणाली का है और उसे अवैध तरीके से खरीदा या बेचा जा रहा था, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि अरुण ट्रेडर्स के संचालक के खिलाफ पहले भी पीडीएस चावल की हेराफेरी से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है। पुराने मामलों के रिकॉर्ड को देखते हुए प्रशासन इस बार की कार्रवाई को गंभीरता से ले रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जांच के बाद इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
जिला प्रशासन और खाद्य विभाग की टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद किया गया 130 बोरी चावल कहां से लाया गया था। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि क्या यह चावल किसी उचित मूल्य दुकान से निकाला गया था या फिर किसी अन्य माध्यम से इसकी खरीद-बिक्री की जा रही थी। पीडीएस प्रणाली सरकार की महत्वपूर्ण योजना है, जिसके तहत गरीब परिवारों को कम कीमत पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। इस व्यवस्था में गड़बड़ी होने से जरूरतमंद हितग्राहियों को नुकसान पहुंचता है। इसी कारण प्रशासन समय-समय पर राशन दुकानों और खाद्यान्न कारोबारियों की जांच करता रहता है।
अधिकारियों ने कहा कि सरकारी खाद्यान्न की कालाबाजारी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके। फिलहाल अरुण ट्रेडर्स मामले में जांच जारी है। गोदाम खुलने और खाद्यान्न के सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि वहां कितनी मात्रा में पीडीएस चावल मौजूद था और इस पूरे मामले में कितने लोग शामिल हैं।
