कच्छ के रण का रहस्यमयी ‘कालो डूंगर’: जहां न्यूट्रल गियर में भी आगे बढ़ने लगती हैं गाड़ियां

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नई दिल्ली। गुजरात के उत्तर-पश्चिम में स्थित कच्छ का रण अपनी सफेद नमक की धरती और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इसी रण के बीच स्थित ‘कालो डूंगर’ (काला पहाड़) अपनी धार्मिक मान्यता और रहस्यमयी घटनाओं के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। कच्छ के खावड़ा गांव के उत्तर में स्थित कालो डूंगर करीब 462 मीटर (1516 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है और इसे कच्छ का सबसे ऊंचा स्थान माना जाता है। यहां से सफेद रण का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है, जिसे देखने हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।

कालो डूंगर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ यहां स्थित करीब 400 वर्ष पुराने भगवान दत्तात्रेय मंदिर के लिए भी प्रसिद्ध है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के संयुक्त अवतार भगवान दत्तात्रेय पृथ्वी भ्रमण के दौरान यहां रुके थे। कथा के अनुसार, उन्होंने भूख से व्याकुल गीदड़ों को अपना शरीर अर्पित कर दिया था और उनका शरीर बार-बार पुनः निर्मित हो जाता था। इसी मान्यता के चलते आज भी मंदिर में गीदड़ों को भोजन खिलाने की परंपरा निभाई जाती है।

कालो डूंगर का सबसे चर्चित रहस्य इसकी ‘मैग्नेटिक रोड’ है। स्थानीय लोगों और पर्यटकों का दावा है कि यहां सड़क के एक विशेष हिस्से में यदि वाहन को न्यूट्रल गियर में छोड़ दिया जाए, तो वह गुरुत्वाकर्षण के विपरीत ढलान की ओर बढ़ने लगता है। यही वजह है कि यह स्थान लंबे समय से लोगों के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है।

हालांकि, इस रहस्य पर आईआईटी कानपुर के शोध में अलग निष्कर्ष सामने आया। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह कोई चुंबकीय शक्ति नहीं बल्कि ऑप्टिकल इल्यूजन (दृष्टि भ्रम) है। आसपास की भौगोलिक बनावट और ढलान की दिशा ऐसी प्रतीत होती है कि सड़क ऊपर जाती हुई दिखाई देती है, जबकि वास्तव में वह हल्की ढलान पर नीचे की ओर होती है। इसी कारण वाहन अपने आप आगे बढ़ते हुए नजर आते हैं। धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और विज्ञान से जुड़े इस अनोखे रहस्य के कारण कालो डूंगर आज भी कच्छ आने वाले पर्यटकों के लिए सबसे खास पर्यटन स्थलों में से एक बना हुआ है।