मेडिकल टूरिज्म का ग्लोबल हब बन रहा भारत, विदेशों से इलाज के लिए बढ़ रही मरीजों की संख्या

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नई दिल्ली। भारत तेजी से मेडिकल टूरिज्म के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, अफ्रीका, खाड़ी देशों और पड़ोसी देशों से बड़ी संख्या में मरीज बेहतर और किफायती इलाज के लिए भारत का रुख कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि कम लागत में विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं, अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त अस्पताल, अनुभवी डॉक्टर और आधुनिक मेडिकल तकनीक भारत को विदेशी मरीजों के लिए आकर्षक बना रहे हैं। कई जटिल सर्जरी और उपचारों की लागत अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड जैसे देशों की तुलना में भारत में काफी कम है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी देशों में इलाज के लिए लंबा वेटिंग पीरियड भी मरीजों को भारत आने के लिए प्रेरित कर रहा है। स्पेशलिस्ट डॉक्टर की अपॉइंटमेंट या सर्जरी में देरी से मरीजों की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं, जबकि भारत में अपेक्षाकृत कम समय में उपचार उपलब्ध हो जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कार्डियक सर्जरी, जॉइंट रिप्लेसमेंट, कैंसर उपचार, फर्टिलिटी ट्रीटमेंट, नेत्र चिकित्सा, डेंटल केयर और अन्य कई विशेषज्ञ उपचार कम लागत में उपलब्ध हैं। चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु और केरल जैसे शहरों में स्थित अस्पताल अंतरराष्ट्रीय मरीजों के लिए विशेष सहायता सेवाएं भी प्रदान कर रहे हैं, जिनमें मेडिकल रिपोर्ट, अपॉइंटमेंट, उपचार योजना, यात्रा और रिकवरी से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं।

भारत के अस्पताल अब कार्डियोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, ऑर्गन ट्रांसप्लांट, फर्टिलिटी केयर, ऑप्थल्मोलॉजी, रोबोटिक सर्जरी, इंटेंसिव केयर और रिहैबिलिटेशन जैसी उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

रिपोर्ट में भारत की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को भी प्रमुख कारण बताया गया है। NABH (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स) और JCI (जॉइंट कमीशन इंटरनेशनल) जैसी मान्यता प्रणालियां भारतीय अस्पतालों की विश्वसनीयता को मजबूत करती हैं।

इसके अलावा, आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुर्वेद, फिजियोथेरेपी और वेलनेस आधारित रिकवरी सुविधाओं का संयोजन भी भारत की एक बड़ी विशेषता माना जा रहा है। यही वजह है कि विदेशी मरीज इलाज के साथ-साथ बेहतर रिकवरी और स्वास्थ्य लाभ के लिए भी भारत को प्राथमिकता दे रहे हैं।