नई दिल्ली। देश के सीमावर्ती क्षेत्रों और प्रमुख शहरों में तेजी से बदल रहे जनसांख्यिकीय परिदृश्य को लेकर केंद्र सरकार ने गंभीर कदम उठाए हैं। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को उच्च स्तरीय समिति के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर अधिकारियों को आवश्यक प्रशासनिक और लॉजिस्टिक सहयोग तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। यह समिति देश के विभिन्न हिस्सों में अवैध घुसपैठ, अप्राकृतिक प्रवास और अन्य कारणों से हो रहे जनसंख्या बदलावों का अध्ययन करेगी। समिति सीमावर्ती जिलों के साथ-साथ महानगरों और औद्योगिक क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का आकलन करेगी तथा अपनी विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी।

गौरतलब है कि, 26 मई को सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर की अध्यक्षता में इस उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था। समिति में पूर्व आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, पूर्व आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और अर्थशास्त्री डॉ. शमिका रवि भी सदस्य हैं। बैठक में गृह मंत्री ने अधिकारियों को अवैध माइग्रेशन और उससे जुड़े विस्थापन के प्रभावों का व्यापक अध्ययन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि, जनसांख्यिकीय बदलाव अब केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका असर देश के बड़े शहरों और औद्योगिक केंद्रों में भी दिखाई दे रहा है। उल्लेखनीय है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ऐसी समिति गठित करने की घोषणा की थी। समिति का उद्देश्य जनसंख्या संरचना में हो रहे बदलावों का विश्लेषण कर सरकार को प्रभावी नीतिगत सुझाव देना है।
