नई दिल्ली। ओमान तट के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) में वाणिज्यिक पोत ‘एमटी सेट्टेबेलो’ पर हुए अमेरिकी हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है। इस दुखद घटना में दो भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि जहाज के मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) अभी भी लापता हैं। फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) के महासचिव मनोज यादव ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए अमेरिकी नौसेना पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना को जहाज पर सवार चालक दल की राष्ट्रीयता के बारे में पहले से पूरी जानकारी थी।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। मंत्रालय के अनुसार, इस मालवाहक जहाज पर कुल 24 भारतीय क्रू मेंबर्स सवार थे, जिनमें से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया है। ओमान में स्थित भारतीय दूतावास लापता नागरिकों की तलाश के लिए वहां के स्थानीय प्रशासन और बचाव दलों के साथ लगातार संपर्क में है। प्रभावित तीनों नाविक भारत के अलग-अलग राज्यों— हिमाचल प्रदेश, देवरिया (उत्तर प्रदेश) और आंध्र प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं।
यूनियन लीडर मनोज यादव ने अमेरिकी रुख पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वह यह मानने को बिल्कुल तैयार नहीं हैं कि अमेरिका को क्रू की नागरिकता का पता नहीं था। उन्हें 101% यकीन है कि अमेरिकी नौसेना को जहाज पर मौजूद भारतीयों की सटीक संख्या पता थी। उन्होंने तर्क दिया कि अगर जहाज उनके निर्देशों का पालन नहीं भी कर रहा था, तो उन्हें हिरासत में लिया जाना चाहिए था, न कि उन पर इस तरह जानलेवा हमला किया जाता। फिलहाल मलबे से संपर्क टूटने के कारण राहत काम में मुश्किलें आ रही हैं, लेकिन भारत सरकार अपने लापता नागरिक को ढूंढने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
