एमसीबी/रायपुर। छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले से स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। हार्ट अटैक से पीड़ित एक महिला को बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया, लेकिन समय पर एम्बुलेंस नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई। घटना जिला मुख्यालय स्थित 220 बिस्तरों वाले अस्पताल की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, झगराखांड निवासी द्वारिका यादव अपनी मां श्यामा बाई को गंभीर हालत में अस्पताल लेकर पहुंचे थे। जांच के बाद डॉक्टरों ने उनकी स्थिति नाजुक बताते हुए शाम करीब 6 बजे उन्हें रायपुर के मेकाहारा अस्पताल रेफर कर दिया।
परिजनों का आरोप है कि रेफर किए जाने के बाद उन्होंने लगातार अस्पताल प्रशासन और 108 एम्बुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन समय पर वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। उनका कहना है कि एम्बुलेंस रात करीब 12 बजे अस्पताल पहुंची, यानी लगभग छह घंटे की देरी से। इस दौरान मरीज की हालत बिगड़ती गई और एम्बुलेंस में शिफ्ट करने के दौरान ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने शव को एम्बुलेंस में रखकर विरोध प्रदर्शन किया और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। स्थिति को देखते हुए अस्पताल परिसर में पुलिस बल तैनात करना पड़ा। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध हो जाती तो मरीज को बेहतर इलाज मिल सकता था और उसकी जान बचने की संभावना रहती। उन्होंने 108 एम्बुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
जानकारी के मुताबिक अस्पताल परिसर में 108 सेवा की दो गाड़ियां मौजूद थीं, इसके बावजूद समय पर मरीज को सुविधा नहीं मिल सकी। कई बार संपर्क करने के प्रयास के बावजूद कॉल कनेक्ट नहीं हुआ और बाद में एम्बुलेंस पहुंचने में भी काफी देरी हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है। टीम में दो डॉक्टर और एक लिपिक कर्मचारी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक आश्वासन के बाद देर रात परिजन शव लेकर अस्पताल से रवाना हुए। इस घटना ने जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और एम्बुलेंस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
