रायपुर। सरगुजा जिले के सीतापुर में नायब तहसीलदार के साथ हुई कथित मारपीट की घटना ने अब एक बड़ा सियासी तूल पकड़ लिया है। इस मामले को लेकर प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार हड़ताल पर चले गए हैं, जिस पर वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर का एक बड़ा बयान सामने आया है। चंद्राकर ने इस आंदोलन पर तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि प्रशासनिक संघों को दबाव बनाने की राजनीति करने के बजाय यह आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर ‘लक्ष्मण रेखा’ किसने लांघी है। उन्होंने साफ किया कि कर्मचारी संघों को अपनी जांच की मांग स्पष्ट करनी चाहिए क्योंकि केवल कार्रवाई की मांग करना और घटना के मूल कारणों को समझना दो अलग बातें हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों की एक गरिमा होती है और शासकीय अधिकारियों को उसका सम्मान करना ही चाहिए।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सीतापुर से भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों पर नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ कथित तौर पर मारपीट करने के आरोप लगे। इसके विरोध में राजस्व अधिकारियों ने मुख्य आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया। मांग पूरी न होने पर पहले सामूहिक अवकाश और कलमबंद हड़ताल की गई, जो अब एक अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन में तब्दील हो चुकी है, जिससे प्रदेश का राजस्व कामकाज ठप है।
इसी बीच, विधायक चंद्राकर ने हसदेव अरण्य मामले में प्रदर्शन की चेतावनी देने वाले नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत पर भी करारा तंज कसा। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि कांग्रेस को पहले यह सार्वजनिक करना चाहिए कि उनकी भूपेश बघेल सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान हसदेव अरण्य को लेकर क्या-क्या कदम उठाए थे, और उन तमाम दस्तावेजों को जनता के सामने पेश करना चाहिए।
