नई दिल्ली। सूरज के तेवर अब और तीखे होने वाले हैं। जैसे ही सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, वैसे ही उत्तर भारत सहित देश के कई हिस्से भीषण गर्मी की चपेट में आ जाएंगे। गर्मी के सबसे प्रचंड दौर यानी ‘नौतपा’ की शुरुआत इस बार 25 मई से हो रही है, जो 2 जून तक चलेगी। इन 9 दिनों में न केवल तापमान रिकॉर्ड तोड़ता है, बल्कि यह समय सनातन परंपरा में आत्म-संयम, अनुशासन और सेवा का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। नौतपा के दौरान सुबह सूर्य देव को अर्घ्य देने और सादगी से रहने का नियम है। इस तपन से खुद को बचाने और दूसरों को राहत देने के लिए शास्त्रों में दिनवार (हर दिन के अनुसार) विशेष दान का महत्व बताया गया है:
पहला दिन (जल सेवा): राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाएं, ठंडा जल और शरबत बांटें।
दूसरा दिन (अन्न दान): गरीब परिवारों को गेहूं और चावल भेंट करें।
तीसरा दिन (शीतलता): मंदिरों या सार्वजनिक जगहों पर छाछ और लस्सी का वितरण करें।
चौथा दिन (राहत): जरूरतमंदों या संस्थाओं को हाथ वाले पंखे या बिजली के पंखे दान करें।
पांचवां दिन (वस्त्र दान): गर्मी से बचाव के लिए सूती (कॉटन) कपड़े बांटें।
छठा दिन (धूप से रक्षा): मजदूरों और गरीबों को छाते तथा चप्पलें दान करें।
सातवां दिन (मजदूर सेवा): कामगारों को पसीना पोंछने के लिए तौलिया और गमछा दें।
आठवां दिन (स्वास्थ्य): अस्पतालों में मरीजों को फल और सुपाच्य भोजन बांटें।
नौवां दिन (महादान): बस स्टैंड या रेलवे स्टेशनों पर पानी से भरे मिट्टी के घड़े (मटके) रखवाएं।
भीषण गर्मी के इस दौर में किया गया आपका एक छोटा सा दान किसी राहगीर को बड़ी राहत दे सकता है।
