वाशिंगटन। भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच अक्सर बड़ी-बड़ी डींगे हांकने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान ने युद्ध के मैदान में ऐसा सबक सिखाया है, जिससे उबरने में वाशिंगटन को कई साल लग जाएंगे। यूएस कांग्रेस की एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के खिलाफ शुरू किए गए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में अमेरिका को भारी सैन्य और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। इस युद्ध में अमेरिका के कुल 2.81 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो चुके हैं। सबसे बड़ा झटका अमेरिकी वायुसेना को लगा है, जिसके 42 अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट और ड्रोन या तो मार गिराए गए या पूरी तरह डैमेज हो गए। नुकसान की इस फेहरिस्त में अमेरिका का सबसे एडवांस 5वीं पीढ़ी का एक F-35 फाइटर जेट, 4 F-15E स्ट्राइक ईगल और एक A-10 थंडरबोल्ट शामिल है। इसके अलावा, ड्रोन कैटेगरी में अमेरिका को सबसे करारी शिकस्त मिली है, जहाँ उसके 24 कुख्यात MQ-9 रीपर और एक MQ-4C ट्राइटन सहित कुल 25 ड्रोन मिट्टी में मिला दिए गए।
इस भारी नुकसान के बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई को जायज ठहराते हुए कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए युद्ध ही एकमात्र विकल्प था। वहीं व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने धमकी दी है कि अगर ईरान शर्तों पर नहीं झुका, तो उसे इतिहास की सबसे भयानक सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। दूसरी ओर, ईरान ने इन धमकियों को सिरे से खारिज करते हुए सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि उसके पास अभी भी कई ऐसे ‘सीक्रेट और स्वदेशी’ आधुनिक हथियार सुरक्षित हैं, जिनका इस्तेमाल उसने अभी तक युद्ध के मैदान में किया ही नहीं है। ईरान का साफ कहना है कि अगर अमेरिका ने दोबारा हिमाकत की, तो इस बार बिना किसी संयम के ऐसा पलटवार होगा जिसकी कल्पना भी नामुमकिन है।
