नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विपक्ष, खासकर अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला। महिला आरक्षण और न्यायिक प्रक्रिया के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि, लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति खुद को कानून से ऊपर नहीं मान सकता। मुख्यमंत्री ने केजरीवाल के एक न्यायिक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि, जब कोई व्यक्ति खुद ही आरोपी, गवाह, वकील और जज बनने की कोशिश करे, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायिक प्रक्रिया से बचने की कोशिश लोकतंत्र और संस्थाओं के प्रति गलत संदेश देती है।
रेखा गुप्ता ने महिला आरक्षण पर भी विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के जरिए ऐतिहासिक पहल की है, लेकिन विपक्ष ने हमेशा इस दिशा में अड़चनें खड़ी कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि, महिलाओं को सिर्फ अधिकार देना काफी नहीं, बल्कि अवसर देना भी जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि आरक्षण और नीतिगत समर्थन से ही राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ सकती है।
अपने संबोधन में उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं- उज्ज्वला, जनधन, जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत- का उल्लेख करते हुए कहा कि, इन योजनाओं ने महिलाओं के जीवन में ठोस बदलाव लाया है। सीएम ने विपक्ष की “महिला विरोधी सोच” पर निशाना साधते हुए कहा कि, महिला सम्मान सिर्फ राजनीति का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि, कानून, न्यायपालिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता।
