मुजफ्फरपुर। बिहार में साइबर अपराध पर पुलिस ने कड़ा प्रहार किया है। ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 67 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया। गिरोह के मास्टरमाइंड, 60 वर्षीय रिटायर्ड सांख्यिकी अधिकारी प्रियरंजन शर्मा और उनके पुत्र अनंत अमीष को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों ने लोगों को फोन और मैसेज के जरिए धमकाया और खुद को सीबीआई, पुलिस या टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताकर लोगों के खातों से पैसे ट्रांसफर करवाए। जांच में यह भी पता चला कि गिरोह फर्जी कंपनियों और एनजीओ के नाम पर बैंक खाते खोलकर ठगी की रकम को कई लेयर में घुमाता था, जिससे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था। पुलिस ने पटना के राजीव नगर स्थित घर पर छापेमारी कर लैपटॉप, मोबाइल, नकदी, बैंक पासबुक और संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए। साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने बताया कि यह गिरोह पिछले एक साल से सक्रिय था और देश के 28 राज्यों में इसकी शिकायतें दर्ज हैं। मुजफ्फरपुर पुलिस ने बताया कि हालिया मामला काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र का है, जहां एक रिटायर्ड बैंक कर्मी को 12 दिन तक डराया गया। आरोपियों ने झांसा दिया कि उसके आधार कार्ड का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों में हुआ है। डर से पीड़ित ने 67 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। अब पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित अपराधियों की तलाश में जुटी है। विशेष टीम ने कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल लेनदेन का विश्लेषण कर आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की। पुलिस ने इसे साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता के रूप में बताया और जनता को सतर्क रहने की अपील की।
मुजफ्फरपुर में डिजिटल अरेस्ट गिरोह का पर्दाफाश, रिटायर्ड अधिकारी और बेटे पर 67 लाख की साइबर ठगी का आरोप
