श्रीनगर। अप्रैल 2025 का वह काला दिन, जब बैसरन (पहलगाम) में आतंकियों ने 25 पर्यटकों सहित 26 लोगों की हत्या कर दी थी, आज भी लोगों के ज़हन में ताज़ा है। इस हमले ने पूरे जम्मू-कश्मीर को झकझोर कर रख दिया था। पर्यटकों ने घाटी से दूरी बना ली और निजी निवेश की रफ्तार भी धीमी पड़ गई।हमले के बाद हालात इतने बिगड़ गए थे कि कई होटल और रेस्तरां बंद होने की कगार पर पहुंच गए। सुरक्षा कारणों से सरकार ने 48 पर्यटन स्थलों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। सीमावर्ती इलाकों में तनाव बढ़ गया और भारत-पाकिस्तान के बीच गोलाबारी की स्थिति भी बनी।हालांकि, एक साल बाद तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। डल झील के किनारे ही नहीं, बल्कि पहलगाम की वादियां भी अब फिर से पर्यटकों की चहल-पहल से गुलजार हैं। स्थानीय लोगों और सरकार के संयुक्त प्रयासों से धीरे-धीरे भरोसा बहाल हुआ और जुलाई 2025 से पर्यटक घाटी में लौटने लगे।चुनौतियों के बावजूद, वर्ष 2025 में कश्मीर घाटी में 1.7 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे। यह संख्या 2024 के 2.36 करोड़ से कम जरूर है, लेकिन 2021 के 1.13 करोड़ पर्यटकों के मुकाबले कहीं अधिक है। 2022 में 1.89 करोड़ और 2023 में 2.12 करोड़ पर्यटकों ने कश्मीर का रुख किया था।अब कश्मीर सिर्फ पर्यटन तक सीमित नहीं रहा। यहां के युवा स्टार्टअप्स के जरिए नई पहचान बना रहे हैं। जम्मू-कश्मीर सरकार की नीतियों के तहत 2020 के 69 स्टार्टअप्स बढ़कर दिसंबर 2025 तक 1,255 हो गए हैं, जिनमें 434 महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप शामिल हैं। सरकार ने 2024-27 की स्टार्टअप नीति के तहत वेंचर कैपिटल, सीड फंडिंग, ऋण गारंटी और मेंटरशिप जैसी सुविधाएं देकर उद्यमिता को बढ़ावा दिया है। निवेश के मोर्चे पर भी कश्मीर ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में 5,260 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हुआ, जो 2021-22 के 377 करोड़ रुपये की तुलना में 14 गुना अधिक है। नई केंद्रीय योजनाओं के तहत 14,292 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं, जिससे 50,000 से अधिक रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद है। इसके अलावा, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में भी जम्मू-कश्मीर ने सुधार करते हुए 2025 में देश में पांचवां स्थान हासिल किया है। हालांकि, बीते वर्ष आतंकवाद और खराब मौसम ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया, लेकिन इसके बावजूद लोगों की आय में वृद्धि हुई है। 2024-25 में प्रति व्यक्ति आय 1.55 लाख रुपये थी, जो 2025-26 में बढ़कर 1.68 लाख रुपये हो गई। कश्मीर ने हमेशा कठिन परिस्थितियों से उबरकर नई उम्मीद जगाई है। महात्मा गांधी ने भी कहा था कि उन्हें कश्मीर में उम्मीद की एक किरण नजर आती है। आज भी कश्मीर उसी जज़्बे के साथ आगे बढ़ रहा है—खौफ से निकलकर विश्वास और विकास की राह पर।
खौफ से विश्वास तक: पहलगाम में फिर गूंजने लगी रौनक, कश्मीर में लौटे करोड़ों सैलानी
