देश में प्रस्तावित नए लेबर कोड को लेकर कर्मचारियों में कई सवाल उठ रहे हैं कि, क्या उनकी सैलरी बढ़ेगी या घटेगी। नए नियमों के अनुसार अब “वेजेस” यानी मूल वेतन कुल CTC का कम से कम 50% होना जरूरी होगा। इसका मतलब यह नहीं है कि बेसिक सैलरी अपने-आप आधी CTC बन जाएगी, बल्कि कंपनियों को अपनी सैलरी संरचना को नए ढांचे के अनुसार बदलना होगा। इस बदलाव का सीधा असर आपके टेक-होम सैलरी पर पड़ सकता है। क्योंकि जैसे ही बेसिक वेतन का हिस्सा बढ़ेगा, प्रोविडेंट फंड (PF) और ग्रेच्युटी में योगदान भी बढ़ जाएगा।

इससे कर्मचारियों को हर महीने हाथ में आने वाली रकम थोड़ी कम मिल सकती है, लेकिन लंबे समय में रिटायरमेंट सेविंग मजबूत होगी। कंपनियां सीधे बेसिक सैलरी बढ़ाने से बच सकती हैं और इसके बजाय अलाउंस स्ट्रक्चर (HRA, कन्वेयंस आदि) में बदलाव करेंगी, ताकि कुल लागत संतुलित रहे। इस बदलाव का असर टैक्स सिस्टम पर भी पड़ेगा। पुराने टैक्स रिजीम में PF बढ़ने से 80C के तहत छूट का लाभ मिल सकता है, जबकि नए टैक्स रिजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन कुछ राहत दे सकता है। कुल मिलाकर, यह बदलाव कर्मचारियों की मासिक इनकम को थोड़ा प्रभावित कर सकता है, लेकिन भविष्य की बचत यानी रिटायरमेंट फंड को मजबूत करने की दिशा में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
