31 मार्च 2027 तक एक हजार वैद्यों के प्रमाणन का लक्ष्य, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का होगा दस्तावेजीकरण
रायपुर। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और औषधीय ज्ञान के संरक्षण की दिशा में प्रदेश के छह जिलों के 309 पारंपरिक वैद्यों को स्वैच्छिक प्रमाणन के तहत प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा कोंडागांव में आयोजित कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने वैद्यों को प्रमाण पत्र वितरित किए। बोर्ड ने 31 मार्च 2027 तक प्रदेश के एक हजार पारंपरिक वैद्यों के प्रमाणन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि पारंपरिक वैद्यों का ज्ञान औषधीय वनस्पतियों की पहचान और पीढिय़ों से अर्जित अनुभव पर आधारित है। यह प्रदेश की अमूल्य विरासत है, जिसे व्यवस्थित रूप से दर्ज कर आने वाली पीढिय़ों के लिए संरक्षित करना जरूरी है। उन्होंने औषधीय पौधों के संरक्षण और संवर्धन पर जोर देते हुए पंचायतों की उपलब्ध भूमि, घरों की बाडिय़ों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर इनके रोपण को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।
मंत्री ने कहा कि स्थानीय वन उत्पादों, औषधीय पौधों और पारंपरिक खाद्य पदार्थों की बेहतर ब्रांडिंग, प्रसंस्करण और विपणन से ग्रामीण समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने साल बीज सहित अन्य वन उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर काम करने तथा कोदो, कुटकी और रागी जैसे पारंपरिक अनाज के पोषण संबंधी महत्व को देखते हुए इनके उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही।
कार्यक्रम में बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं कोंडागांव विधायक लता उसेंडी, छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला सहित जनप्रतिनिधि, पारंपरिक वैद्य तथा वन विभाग और बोर्ड के अधिकारी उपस्थित रहे।
