इंद्रावती टाइगर रिजर्व में चारागाह प्रबंधन एवं मैदानी प्रशिक्षण पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

Follow Us

बीजापुर। इंद्रावती टाइगर रिजर्व, बीजापुर में 24 एवं 25 अक्टूबर, 2026 को चारागाह प्रबंधन एवं मैदानी प्रशिक्षण पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में घासभूमियों के संरक्षण एवं वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों की क्षमता विकसित करना था। यह कार्यक्रम मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), जगदलपुर, उत्तम कुमार गुप्ता के निर्देशानुसार तथा इंद्रावती टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक सुमेध संजय सुरवाडे के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यशाला में चारागाह प्रबंधन विशेषज्ञ डॉ. जी. डी. मुरतकर ने प्रशिक्षण प्रदान किया।

सैद्धांतिक प्रशिक्षण
25 अक्टूबर को प्रस्तुतीकरण के माध्यम से चारागाह विकास एवं प्रबंधन के विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। इसमें बहुवर्षीय एवं वार्षिक खाद्य घास प्रजातियों, जंगली फलीदार वनस्पतियों और खाद्य झाडिय़ों का चयन, जैवभार प्रबंधन, निरीक्षण पथ एवं अग्नि रेखा का निर्माण, निगरानी योजना तथा चारागाह विकास रजिस्टर तैयार करना शामिल था। साथ ही, पांच से सात वर्ष की कार्ययोजना एवं बजट अनुमान तैयार करने, ऑपरेशन कैलेंडर बनाने तथा देशी घासों के बीज संग्रहण की मानक संचालन प्रक्रिया (स्ह्रक्क) पर भी चर्चा की गई।

विशेषज्ञ ने चारागाह विकास में स्थानीय एवं देशी घास प्रजातियों को प्राथमिकता देने तथा विदेशी (श्व&शह्लद्बष्) प्रजातियों के रोपण से बचने की सलाह दी, ताकि क्षेत्र की प्राकृतिक वनस्पतियों एवं पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखा जा सके।

प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता पर टिप्पणी कांग्रेस की संस्कारहीन राजनीति का प्रमाण : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

चारागाहों की स्थिति एवं प्रबंधन संबंधी सुझाव
प्रशिक्षण के दौरान इंद्रावती टाइगर रिजर्व के चारागाहों में काष्ठीय प्रजातियों एवं खरपतवारों का अतिक्रमण, घासभूमियों का कम विस्तार, वन्यजीवों के लिए उपयोगी घासों की कम उपलब्धता तथा मृदा अपरदन जैसी चुनौतियां सामने आईं। क्षेत्र में पाई जाने वाली जंगली फलीदार वनस्पतियों, जैसे बन तुवर एवं बन झुंझुना, की पहचान और उनके महत्व पर भी जानकारी दी गई।

इन समस्याओं के समाधान हेतु खरपतवारों को फल एवं बीज बनने से पहले हटाने, घास के बीजों के संवर्धन, काष्ठीय प्रजातियों के उचित प्रबंधन तथा मृदा अपरदन की रोकथाम पर जोर दिया गया। चारागाहों की नियमित निगरानी एवं वैज्ञानिक कार्ययोजना के माध्यम से उनकी स्थिति में सुधार करने की आवश्यकता भी बताई गई।

मैदानी प्रशिक्षण
कार्यशाला के अंतर्गत कुटरू बफर, बीजापुर बफर एवं मद्देड़ बफर क्षेत्रों में मैदानी प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों ने चारागाहों की वास्तविक स्थिति का अवलोकन किया तथा घास प्रजातियों की पहचान एवं प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की।

न्यायधानी नाइट्स की लगातार तीसरी जीत, सेमीफाइनल के करीब पहुंची टीम

अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सहभागिता
कार्यशाला में एसडीओ प्रखर नायक, एसडीओ कुबेर बारिहा, वन परिक्षेत्र अधिकारी कुमार वर्मा, कुमारी राखी सलाम, रामायण मिश्रा एवं राजकुमार पट्टौदी सहित इंद्रावती टाइगर रिजर्व के विभिन्न क्षेत्रों के अधिकारी एवं मैदानी कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यशाला के माध्यम से चारागाहों के वैज्ञानिक प्रबंधन, देशी घास प्रजातियों के संवर्धन एवं प्राकृतिक घासभूमियों के संरक्षण के लिए आवश्यक तकनीकी समझ विकसित करने पर बल दिया गया। यह पहल इंद्रावती टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण है।